वर्चस् की साधना आत्मबल उभारने के लिये – २
गाँधी जी का शरीर बहुत दुर्बल था। वे मात्र १६ पौंड के थे। शारीरिक दृष्टि से उनकी सामर्थ्य उपहासास्पद ही गिनी जायगी। उन्हें तो कोई किशोर भी दौड़ने या लड़ने की चुनौती दे सकता था, पर उनकी शक्ति का मूल्याकंन जिनने किया है वे जानते हैं कि पर्वत से ऊँचा और…
वर्चस् की साधना आत्मबल उभारने के लिये – १
वर्चस् की साधना आत्मबल उभारने के लिये- उपनिषद का ऋषि कहता है- “नयमात्मा बल हीने लभ्यो” यह आत्म दुर्बलों को मिल ही नहीं सकता। विभिन्न बलों की साधना विभिन्न क्षेत्रों में अपने- अपने ढंग से की जाती है। साधना बल भी एक बल है। प्रगति और सुख- सुविधा…
महापुरुषों द्वारा गायत्री महिमा का गान
हिन्दू धर्म में अनेक मान्यतायें प्रचलित हैं ।। विविध बातों के सम्बन्ध में परस्पर विरोधी मतभेद भी हैं ,, पर गायत्री मंत्र की महिमा, एक ऐसा तत्त्व है जिसे सभी ने, सभी सम्प्रदायों ने, सभी ऋषियों ने एक मत से स्वीकार किया है ।। अथर्ववेद १९- ७१ में गायत्री की…
तत्वज्ञान एवं विवेचन
गायत्री वैदिक संस्कृत का एक छन्द है जिसमें आठ- आठ अक्षरों के तीन चरण- कुल 24 अक्षर होते हैं ।। गायत्री शब्द का अर्थ है- प्राण- रक्षक ।। गय कहते हैं प्राण को, त्रि कहते हैं त्राण- संरक्षण करने वाली को ।। जिस शक्ति का आश्रय लेने पर प्राण का, प्रतिभा का,…
महाभारत और गायत्री
गायत्री मंत्र वेदों में कई बार आता है और उसकी महिमा तो वेद शास्त्रों, आरण्यक और सूत्र ग्रंथों तथा उपनिषद् दर्शनों में कई स्थानों पर पाई गयी है ।। इसका कारण है कि गायत्री मंत्र आदि काल से भारतीय धर्मानुयायियों का उपास्य मंत्र रहा है ।। महाभारत में भी…
वेदों में गायत्री का गौरव
तस्मात् अज्ञान सर्व हुतः ऋचा सामानि अज्ञिरे ।। छन्दांसि जज्ञिरे तस्मात् यजुस्तस्समाद जायत ॥ (यजुः 31- 7) अर्थात् उस यज्ञ का रूप परम ब्रह्म परमात्मा द्वारा चारों वेद ऋक्, यज्, साम, अथर्व सृष्टि के आदि में प्रादुर्भूत हुए ।। (1) ऋग्वेद- में ज्ञान की बातें…
गायत्री मंगलमयी मधुविद्या
बृहदारण्यक उपनिषद् में जिस मधु विद्या का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है ।। उसका सम्बद्ध गायत्री से ही है ।। जिस प्रकार पारस मणि के स्पर्श से लोहे के टुकड़ों का ढेर भी सोना हो जाता है ।। उसी प्रकार इस संसार की अनेकों कडुआ, कुरूप, कष्टदायक, प्रतिकूल…
गायत्री का व्याख्या विस्तार
गायत्री महामंत्र के 24 अक्षरों में इतना ज्ञान- विज्ञान भरा हुआ है कि उसका अन्वेषण करने से सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है ।। ब्रह्माजी ने गायत्री के चार चरणों की व्याख्या स्वरूप चार मुखों से चार वेदों का वर्णन किया ।। महर्षि वाल्मीकि ने अपनी वाल्मीकि…
गायत्री मंत्र
गायत्री मंत्र :- ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।
तीन चरणों की अनंत सार्मथ्य
गायत्री को त्रिपदा कहा गया है, उसके तीन चरण हैं ।। इनमें से प्रत्येक चरण तीन लोकान्तरों तक फैला हुआ है ।। उसके माध्यम से आत्मा की गति केवल इसी लोक तक सीमित नहीं रहती वरन् वह अन्य लोकों तक अपना क्षेत्र विस्तृत कर सकता है और वहाँ उपलब्ध साधनों से लाभान्वित…