शाबर मन्त्र

शाबर मंत्र: रहस्य, सिद्धि और प्रयोग की विस्तृत जानकारी

शाबर मंत्र भारत की प्राचीन तांत्रिक परंपरा का एक अत्यंत रहस्यमय और प्रभावशाली भाग हैं। ये मंत्र विशेष रूप से तंत्र साधकों, अघोरियों और गोरखनाथी संप्रदाय के योगियों द्वारा उपयोग किए जाते हैं। इनकी विशेषता यह है कि ये सीधे लोक भाषा (हिंदी, अवधी, भोजपुरी, राजस्थानी, ब्रजभाषा आदि) में होते हैं और आमजन द्वारा भी समझे जा सकते हैं।


1. शाबर मंत्र की उत्पत्ति और इतिहास

शाबर मंत्रों का श्रेय गुरु गोरखनाथ और नाथ संप्रदाय को दिया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि गोरखनाथ ने अपने शिष्यों के लिए ऐसे मंत्रों की रचना की, जिन्हें कोई भी आसानी से उच्चारण कर सके और बिना विशेष संस्कार या विधि-विधान के भी प्रभावी परिणाम प्राप्त कर सके।

इन मंत्रों में गुरु गोरखनाथ, बाबा कीनाराम, अघोreshwar, दत्तात्रेय, दत्त गोरखनाथ आदि तांत्रिक गुरुओं का आह्वान किया जाता है। यह सिद्ध तांत्रिक गुरु ही अपने योग्य शिष्यों को शाबर मंत्रों की दीक्षा देते हैं।


2. शाबर मंत्रों की विशेषताएँ

  1. आसान भाषा: संस्कृत की कठिन व्याकरणिक बाधाओं से मुक्त होते हैं।
  2. गुरु की शक्ति: इन मंत्रों में गुरु गोरखनाथ, बाबा कीनाराम, गुरु दत्तात्रेय आदि का आह्वान होता है।
  3. शीघ्र प्रभावी: अन्य तांत्रिक मंत्रों की तुलना में यह जल्दी असर दिखाते हैं।
  4. सिद्धि की प्रक्रिया सरल: यदि सही विधि से जाप किया जाए तो यह शीघ्र सिद्ध हो जाते हैं।
  5. सुरक्षा कवच: इनका दुष्प्रभाव नहीं होता यदि सही तरीके से गुरु निर्देश में किया जाए।
  6. हर प्रकार की समस्या का समाधान: धन, स्वास्थ्य, सुरक्षा, वशीकरण, रोग नाश, तांत्रिक रक्षा, भूत-प्रेत बाधा आदि।

3. शाबर मंत्र की शक्ति और सिद्धि

(A) सिद्ध करने की प्रक्रिया

  1. गुरु दीक्षा आवश्यक: बिना गुरु कृपा के शाबर मंत्रों की सिद्धि संभव नहीं होती।
  2. साधना की विधि:
    • मंत्र का जाप करने से पहले स्नान करके पवित्र स्थान पर बैठें।
    • धूप-दीप जलाएं और गुरु को प्रणाम करें।
    • एक निश्चित संख्या में (सामान्यतः 108 बार या 1,25,000 बार) मंत्र का जाप करें।
    • जाप पूर्ण होने पर गुरु या देवी-देवता को धन्यवाद दें।

4. शाबर मंत्रों के प्रकार और उनके प्रयोग

(A) भूत-प्रेत बाधा निवारण शाबर मंत्र

“गुरु गोरखनाथ की दुहाई।
भूत-प्रेत भागे, मारो घुड़ाई।
शब्द सांचा, पीर मेरा पावना।
गुरु गोरखनाथ की आग्या।”

प्रयोग:

  • शनिवार या अमावस्या की रात मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • अभिमंत्रित जल रोगी को दें या घर में छिड़कें।
  • किसी को भूत बाधा हो तो यह मंत्र उसके कान में पढ़ें।

(B) वशीकरण शाबर मंत्र

“गुरु गोरखनाथ की दुहाई,
फूल चढ़े तो वह मोहे।
शब्द सांचा, पीर मेरा पावना।”

प्रयोग:

  • शुक्रवार को मंत्र का 21 बार जाप करें।
  • जिससे प्रेम प्राप्त करना हो, उसके सामने इस मंत्र का उच्चारण करें।
  • सिद्धि के बाद इस मंत्र का प्रभाव तत्काल होता है।

(C) शत्रु नाशक शाबर मंत्र

“ऊँ नमो आदेश गुरु गोरखनाथ की।
शत्रु सवा लाख, एक मरे तो सब सिधाय।”

प्रयोग:

  • किसी शत्रु से रक्षा के लिए मंगलवार को यह मंत्र 108 बार पढ़ें।
  • नींबू पर इस मंत्र को 21 बार पढ़कर शत्रु के रास्ते में फेंक दें।

(D) धन प्राप्ति शाबर मंत्र

“ऊँ ह्रीं श्रीं लक्ष्मी वास कर,
दारिद्र्य नाश कर, कर-कर सिद्धि।
गुरु गोरखनाथ की आज्ञा।”

प्रयोग:

  • शुक्रवार को मंत्र का जाप करें।
  • अभिमंत्रित चावल को तिजोरी में रखें।
  • 21 दिनों तक इस मंत्र का जाप करें, धन की वृद्धि होगी।

(E) रोग निवारण शाबर मंत्र

“गुरु गोरखनाथ की दुहाई।
रोग भागे, ज्वर सिधाए।
शब्द सांचा, पीर मेरा पावना।”

प्रयोग:

  • रोगी पर इस मंत्र को 108 बार पढ़कर जल छिड़कें।
  • इस मंत्र को रोगी के कान में धीरे-धीरे पढ़ें।

5. शाबर मंत्र के प्रयोग में सावधानियाँ

  1. बिना गुरु के शाबर मंत्रों का प्रयोग न करें।
  2. किसी को हानि पहुँचाने के लिए इनका दुरुपयोग न करें।
  3. तांत्रिक नियमों का पालन करें – पवित्रता, संयम और भक्ति रखें।
  4. सही संख्या में जाप करें और अधूरा प्रयोग न करें।
  5. सिद्ध मंत्रों को गुप्त रखें – इन्हें बिना अनुमति किसी को न दें।

6. निष्कर्ष

शाबर मंत्र साधारण शब्दों में होने के बावजूद अत्यंत प्रभावशाली होते हैं। इनका सही प्रयोग करने पर जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है। लेकिन ध्यान रहे, इनका प्रयोग अनुशासन और गुरु कृपा से किया जाए, अन्यथा परिणाम विपरीत भी हो सकते हैं।

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