वेदों में गायत्री का गौरव
तस्मात् अज्ञान सर्व हुतः ऋचा सामानि अज्ञिरे ।। छन्दांसि जज्ञिरे तस्मात् यजुस्तस्समाद जायत ॥ (यजुः 31- 7) अर्थात् उस यज्ञ का रूप परम ब्रह्म परमात्मा द्वारा चारों वेद ऋक्, यज्, साम, अथर्व सृष्टि के आदि में प्रादुर्भूत हुए ।। (1) ऋग्वेद- में ज्ञान की बातें…