समाधि Choiceless awareness।
यह बताना जरूरी नहीं कि कब कहाँ कैसे यह अनुभव हुआ। मगर समाधि निश्चय ही एक विरल घटना है। हमें नींद का पता है, हमें यह भी पता है कि कई बार आँख खुली होती है। दृश्य भी होता है…
यह बताना जरूरी नहीं कि कब कहाँ कैसे यह अनुभव हुआ। मगर समाधि निश्चय ही एक विरल घटना है। हमें नींद का पता है, हमें यह भी पता है कि कई बार आँख खुली होती है। दृश्य भी होता है…
साधना विज्ञान में विशेष कर वाममार्गी तांत्रिक साधनाओं में यंत्र-साधना का बड़ा महत्व है । जिस तरह देवी-देवताओं की प्रतीकोपासना की जाती है और उनमें सन्निहित दिव्यताओं, की अवधारणा की जाती है, उसी तरह ‘यंत्र’ भी किसी देवी या देवता…
शिव पुराण – कथा: अवतारों की कथा सागर-मंथन की कथा से शिव (shiva) का रूप निखरता है। ऋग्वेभद में जहॉ सूर्य, वरूण,वायु, अग्नि, इंद्र आदि प्राकृतिक शक्तियों की उपासना है वहीं ‘रूद्र’ का भी उल्लेख है। पर विनाशकारी शक्तियों के…
राघाजी भगवान श्री कृष्ण की परम प्रिया हैं तथा उनकी अभिन्न मूर्ति भी। भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को बरसाना के श्री वृषभानु जी के यहां राघा जी का जन्म हुआ था। श्रीमद्देवी भागवत में कहा गया है…
इस दुनिया में सबसे ज्यादा अजीब कुछ है तो, खुद इंसान ही है। पहाड़ों पर, हसीन वादियों के बीच, समुद्र की लहरों पर, चांद पर…..हर जगह इंसान अपना आसियाना बनाना चाहता है। किन्तु इसी दुनिया में कुछ ऐसे लोग भी…
पीलिया(Jaundice) का मंत्र ॐ नमो आदेश गुरु का… श्रीराम सर साधा… लक्ष्मण साधा बाण… काला-पीला-रीता…. नीला थोथा पीला…. पीला चारों झड़े तो रामचंद्रजी रहै नाम…. मेरी भक्ति…. गुरु की शक्ति…. फुरे मंत्र ईश्वरोवाचा। काँसे के पात्र में जल भरकर, नीम…
या श्री: स्वयम स्वकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मी: पापात्मनां कृतधियां हृद्येशु बुद्धि: | श्रृद्धा शतां कुलजन प्रभवस्य लज्जा, ता त्वां नतास्म परिपालय देवि विश्वं || जो महा शक्ति पुण्यात्माओं के गृह में लक्ष्मी स्वरुप में, पापियों के घर में दरिद्रता रूप में,…
भगवान शिव का वर्णन करना भी क्या संभव है. एक तरफ वह भोलेपन की सर्व उच्चावस्था मे रह कर भोलेनाथ के रूप मे पूजित है वही दूसरी और महाकाल के रूम मे साक्षात प्रलय रुपी भी. निर्लिप्त स्मशानवासी हो कर…
गुरु सत्यम गुरुर्शास्त्रं, गुरुर्वेदो गुरुर्गति | गुरुमेव महत् सर्व तस्मै श्री गुरुवे नमः || गुरु ही सत्य है, गुरु ही शास्त्र है, गुरु ही वेद हैं और गुरु से ही गति प्राप्त हो सकती है, सही अर्थों में तो गुरु…
आदि महादेव का पंचाक्षरी महामंत्र प्रयोग प्रचंडं प्रकष्ठं प्रगल्भं परेशं, अखंडं अजं भानु कोटि प्रकाशं, त्रयः शूल निर्मूलनं शूल पाणी, भजेऽम भवानिम पति भाव-गम्यं | प्रिय स्नेही स्वजन ! ये साधना मूल रूप से भगवान् शिव की कृपा प्राप्ति हेतु है और…