यही यजुर्वेदीओं का विशेष विवाह नक्षत्र है इस प्रथम नक्षत्र के देवता अश्वनी कुमार हैं जो देवताओं के चिकित्सक है शरद पूर्णिमा का चंद्र इसी नक्षत्र में होता है अतः इसे शारदीय नक्षत्र भी कहते हैं यह घोड़े के मुख्य आकार का 3 तारों का पुंज होता है इस नक्षत्र में यंत्र मशीनरी कल कारखाने यात्रा दूरसंचार कंप्यूटर चिकित्सा औषधी तथा रसायन संबंधी कार्य करने चाहिए यह 30 मुहुर्त नक्षत्र है इसे पुल्लिंग माना जाता है और इसका प्रथम चरण गंडांत दोष से युक्त होता है