शंकर आराधना
निर्जन वन में विल्वपत्र अथवा केले के पेड़ के नीचे बैठकर प्रथम श्री शंकर महादेव की आराधना निम्नलिखित मन्त्र से करें:-
ॐ रुद्राय नमः स्वाहा,
ॐ त्रयम्बकाय नमः स्वाहा ।
ॐ यक्ष राजय स्वाहा,
ॐ त्रयलोचनाय स्वाहा॥
क्रिया-एकाग्र चित्त होकर इस मन्त्र का पाँच सहस्त्र बार जाप निर्जन वन में करें, तत्पश्चात घर पर आकर खीर का भोजन करें और कुआरी कन्याओं को खीर का भोजन करावें । दूसरी क्रिया- वट वृक्ष या पीपल की जड़ में शिवजी की स्थापना करके जल चढ़ावें और एकाग्र चित्त से पाँच सहस्त्र मालाएं उक्त मन्त्र की जपें।
कुबेर आराधना मन्त्र
ॐ कुवेराय नमः
ॐ यक्षराज नमस्तुभ्यं शंकरो प्रिय बान्धवः । काला काला महा काले यक्षिणी वशगां कुरु ॥ क्रिया – इस प्रकार श्री कुबेर की आराधना एक हजार एक बार एक मंत्र से करें। तत्पश्चात् यक्षिणी क्रिया करें।
साधन नियम
सदैव हल्की खीर का भोजन करें, सत्यवादी और ब्रम्हचर्य से रहें। दिन में कभी न सोवें तथा एक बार भोजन करें, मौन व्रत धारण करें रात्रि को कुछ भी न खायें और भूमि पर सोवें। रक्त चन्दन विशेष रूप से लगावें और श्वेत रंग के पदार्थ का सेवन करते रहें ।
यक्षिणियों के नाम
यक्षिणी चौदह प्रकार की हैं जैसे-
1. महायक्षिणी
2. सुन्दरी
3. मनोहारी
4. कनक यक्षिणी
5. कामेश्वरी
6. रतिप्रिया
7. पद्मिनी
8. एनटी
9. रागिनी
10. विशाला
11. चन्द्रिका
12. लक्ष्मी
13. शोभना
14. मर्दना ।