शक्ति की अधिष्ठात्री त्रिपदा गायत्री
संसार के समस्त दुःखों के तीन प्रधान कारण हैं- (1)अज्ञान, (2) अभाव, (3) अशक्ति ।। सत्, रज, तम, की त्रिविधि प्रकृति से मनुष्य का निर्माण हुआ है। वस्तुतः सत्ता दो की है ।। सत् और तम की ।। रज की…
संसार के समस्त दुःखों के तीन प्रधान कारण हैं- (1)अज्ञान, (2) अभाव, (3) अशक्ति ।। सत्, रज, तम, की त्रिविधि प्रकृति से मनुष्य का निर्माण हुआ है। वस्तुतः सत्ता दो की है ।। सत् और तम की ।। रज की…
गायत्री कोई स्वतंत्र देवी- देवता नहीं है ।। यह तो परब्रह्म परमात्मा का क्रिया भाग है ।। ब्रह्म निर्विकार है, अचिन्त्य है, बुद्धि से परे है, साक्षी रूप है, परन्तु अपनी क्रियाशील चेतना शक्ति रूप होने के कारण उपासनीय है…
नाभिपद्म भुवा विष्णेब्रह्मणानिर्मितं जगत् ।। स्थावरं जंगमं शक्त्या गायत्र्या एवं वै ध्रुवम॥ (विष्णोः) विष्णु की (नाभिपद्म भुवा) नाभि कमल से उत्पन्न हुए (ब्रह्मणा) ब्रह्मा ने (गायत्र्याः शक्त्या एव) गायत्री शक्ति से ही (स्थावरं जंगमं) जड़ तथा चेतन (जगत्) संसार को…
गायत्री साधना सदबुद्धि की आराधना- उपासना है ।। गाय को वेदों की माता- वेदमाता कहा जाता है ।। वेद शब्द का अर्थ है ”ज्ञान” ।। यह ज्ञान कल्याण (ऋक् ), पौरुष (यजु), क्रीड़ा (साम) एवं अर्थ (अथर्वण)- इन चार उपक्रमों…
सूर्य सूर्य (देवनागरी: सूर्य, sūrya) मुखिया है, सौर देवता, आदित्यों में से एक, कश्यप और उनकी पत्नियों में से एक अदिति के पुत्र, इंद्र का, या द्यौस पितर का (संस्करण पर निर्भर करते हुए). उनके बाल और हाथ स्वर्ण के…
श्री साँई चालीसा श्री साँई के चरणों में, अपना शीश नवाऊं मैंकैसे शिरडी साँई आए, सारा हाल सुनाऊ मैं कौन है माता, पिता कौन है, यह न किसी ने भी जाना। कहां जन्म साँई ने धारा, प्रश्न पहेली रहा बना…
श्री काली चालीसा ॥॥दोहा ॥॥ जयकाली कलिमलहरण, महिमा अगम अपार महिष मर्दिनी कालिका, देहु अभय अपार ॥ अरि मद मान मिटावन हारी । मुण्डमाल गल सोहत प्यारी ॥ अष्टभुजी सुखदायक माता । दुष्टदलन जग में विख्याता ॥1॥ भाल विशाल मुकुट…
श्री शनि चालीसा ॥दोहा॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल। दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज। करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥ जयति जयति शनिदेव दयाला।…
पार्वती जी की चालीसा ॥ दोहा ॥ जय गिरी तनये डग्यगे शम्भू प्रिये गुणखानी गणपति जननी पार्वती अम्बे ! शक्ति ! भवामिनी ॥ चालीसा॥ ब्रह्मा भेद न तुम्हरे पावे , पांच बदन नित तुमको ध्यावे शशतमुखकाही न सकतयाष तेरो ,…
दोहा श्री गुरु चरण ध्यान धर, सुमिरि सच्चिदानन्द। श्याम चालीसा भजत हूँ, रच चैपाई छन्द।। चौपाई श्याम श्याम भजि बारम्बारा,सहज ही हो भवसागर पारा। इन सम देव न दूजा कोई, दीन दयालु न दाता होई। भीमसुपुत्र अहिलवती जाया, कहीं भीम…