महायोगी गुरु गोरखनाथ जी का इतिहास
महायोगी गुरु गोरखनाथ सिद्ध गोरक्षनाथ को प्रणाम सिद्धों की भोग-प्रधान योग-साधना की प्रतिक्रिया के रूप में आदिकाल में नाथपंथियों की हठयोग साधना आरम्भ हुई। इस पंथ को चलाने वाले मत्स्येन्द्रनाथ (मछंदरनाथ) तथा गोरखनाथ (गोरक्षनाथ) माने…
क्या है इच्छाशक्ति का मूल?
इस दुनिया में विद्युत की प्रकृति अभी तक एक रहस्य है, किंतु मनुष्य ने उससे लाभ उठाने के हजारों मार्ग खोज लिए हैं। विद्युत प्रकृति में सर्वत्र पाई जाती है, किंतु इसे प्राप्त कर एकत्र करना, उसका भंडारण करना तथा उपयोग करना मनुष्य द्वारा अभिकल्पित एवं निर्मित…
तँत्र विद्या की उपयोगिता
प्रकृति अनन्त शक्तियों का भण्डार है । वैज्ञानिकों ने वायुयान, रेडियो, विद्युत, वाष्प आदि के अनेक आश्चर्य जनक आविष्कार किये हैं और नित्यप्रति होते जा रहे हैं पर प्रकृति का शक्ति भण्डार अनन्त और अपार है कि धुरधंर वैज्ञानिक अब तक यही कह रहे हैं कि हमने उस…
शिव का स्वरूप
शिव की महिमा अनंत है। उनके रूप, रंग और गुण अनन्य हैं। समस्त सृष्टि शिवमयहै। सृष्टि से पूर्व शिव हैं और सृष्टि के विनाश के बाद केवल शिव ही शेष रहते हैं। ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की, परंतु जब सृष्टि का विस्तार संभव न हुआ तब ब्रह्मा ने…
दुनिया के सात पाप
यह सवाल हमेशा कौंधता रहा है कि पाप क्या है और पुण्य क्या है? इससे भी बढ़कर कि पापों में भी महापाप क्या हैं। हर धर्म ने इसकी अपनी व्याख्या की है। जब से मनुष्य ने होश संभाला है तभी से उसमें पाप-पुण्य, भलाई-बुराई, नैतिक-अनैतिक पर मंथन करते आध्यात्मिक विचार…
गोगा जी महाराज(सिद्धनाथ वीर गोगादेव)
राजस्थान के सिद्धों के सम्बन्ध में एक चर्चित दोहा है : ‘‘पाबू, हडबू, रामदे, माँगलिया, मेहा। पाँचू पीर पधारज्यों, गोगाजी जेहा” सिद्ध वीर गोगादेव के जन्मस्थान, जो राजस्थान के चुरू जिले के दत्तखेड़ा (ददरेवा) में स्थित है। जहाँ पर सभी धर्म और सम्प्रदाय…
समाधि Choiceless awareness।
यह बताना जरूरी नहीं कि कब कहाँ कैसे यह अनुभव हुआ। मगर समाधि निश्चय ही एक विरल घटना है। हमें नींद का पता है, हमें यह भी पता है कि कई बार आँख खुली होती है। दृश्य भी होता है तो भी देखना नहीं होता ! आवाज़ें आती हैं सुनना नहीं होता। जब मन में…
यंत्रों का रहस्यमय विज्ञान
साधना विज्ञान में विशेष कर वाममार्गी तांत्रिक साधनाओं में यंत्र-साधना का बड़ा महत्व है । जिस तरह देवी-देवताओं की प्रतीकोपासना की जाती है और उनमें सन्निहित दिव्यताओं, की अवधारणा की जाती है, उसी तरह ‘यंत्र’ भी किसी देवी या देवता के प्रतीक होते…
शिव
शिव पुराण – कथा: अवतारों की कथा सागर-मंथन की कथा से शिव (shiva) का रूप निखरता है। ऋग्वेभद में जहॉ सूर्य, वरूण,वायु, अग्नि, इंद्र आदि प्राकृतिक शक्तियों की उपासना है वहीं ‘रूद्र’ का भी उल्लेख है। पर विनाशकारी शक्तियों के प्रतीक ‘रूद्र’ गौण देवता…
राधा जी
राघाजी भगवान श्री कृष्ण की परम प्रिया हैं तथा उनकी अभिन्न मूर्ति भी। भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को बरसाना के श्री वृषभानु जी के यहां राघा जी का जन्म हुआ था। श्रीमद्देवी भागवत में कहा गया है कि श्री राघा जी की पूजा नहीं की जाए तो मनुष्य श्री…