श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ द्वादशोऽध्यायः- भक्तियोग
श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ द्वादशोऽध्यायः- भक्तियोग (साकार और निराकार रूप से भगवत्प्राप्ति) अर्जुन उवाच एवं सततयुक्ता ये भक्तास्त्वां पर्युपासते । ये चाप्यक्षरमव्यक्तं तेषां के योगवित्तमाः ॥ (१) भावार्थ : अर्जुन ने पूछा – हे भगवन! जो विधि आपने बतायी है…
श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ एकादशोऽध्यायः- विश्वरूपदर्शनयोग
श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ एकादशोऽध्यायः- विश्वरूपदर्शनयोग (अर्जुन द्वारा विश्वरूप के दर्शन के लिये प्रार्थना) अर्जुन उवाच मदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसञ्ज्ञितम् । यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं विगतो मम ॥ (१) भावार्थ : अर्जुन ने कहा – मुझ पर कृपा करने…
श्रीमद् भगवद्गीता:- अथ द्वितीयोऽध्यायः- सांख्ययोग
अथ द्वितीयोऽध्यायः- सांख्ययोग ( अर्जुन की कायरता के विषय में श्री कृष्णार्जुन-संवाद ) संजय उवाच तं तथा कृपयाविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम् । विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः ॥ भावार्थ : संजय बोले- उस प्रकार करुणा से व्याप्त और आँसुओं से पूर्ण तथा व्याकुल…
श्रीमद्भगवद्गीता:- अथ प्रथमोऽध्यायः- अर्जुनविषादयोग
अथ प्रथमोऽध्यायः- अर्जुनविषादयोग ( दोनों सेनाओं के प्रधान-प्रधान शूरवीरों की गणना और सामर्थ्य का कथन ) धृतराष्ट्र उवाच धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः । मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय ॥ भावार्थ : धृतराष्ट्र बोले- हे संजय! धर्मभूमि…
जानिए भगवद् गीता के 9 बेहतरीन मैनेजमेंट सूत्र जिनमे छुपा है आपकी हर परेशानी का हल
Bhagavad Gita Slokas With Meaning in Hindi: धर्म ग्रंथों के अनुसार मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इसलिए प्रतिवर्ष इस तिथि को गीता जयंती का पर्व मनाया जाता है।…