यक्षिणी साधना
शंकर आराधना निर्जन वन में विल्वपत्र अथवा केले के पेड़ के नीचे बैठकर प्रथम श्री शंकर महादेव की आराधना निम्नलिखित मन्त्र से करें:- ॐ रुद्राय नमः स्वाहा, ॐ त्रयम्बकाय नमः स्वाहा । ॐ यक्ष राजय स्वाहा, ॐ त्रयलोचनाय स्वाहा॥ क्रिया-एकाग्र चित्त होकर इस मन्त्र…
पितृ दोष के बचाव
पितृदोष से बचाव के विभिन्न उपाय किसी भी दोष का शमन अथवा निवारण करने से अधिक अच्छा यह होता है कि उस दोष से बचा जाए। दोष से बचने के उपायों में सबसे अधिक कारगर यह होता है कि दोष होने की स्थिति की अच्छी जानकारी हो। पितृदोष अथवा पितृ प्रकोप क्यों होता है,…
1 :- महायक्षिणी सिद्धि
सिद्धि करने का समय यह यक्षिणी रात्रि के तीसरे पहर में सिद्ध की जाती है, रात्रि को नियमित समय पर श्मशान भूमि में जाने और सुष्मणानाड़ी के चलते समय वट वृक्ष के ऊपर चारासें ओर से एकाग्रचित्त करके नीचे लिखे मनत्र का पाँच हजार बार जाप नित्य करें । मन्त्र ॐ…
मंत्र जाप के नियम
जप-तप जप-तप तीन प्रकार के होते हैं:- १. वाचिक 2. उपांशु ३. मानसिक वाचक जप में लोग जोर-जोर से ऊँची आवाज में जप करते हैं तभी उन्हें पावचक्र कहा जाता है । जो लोग इस प्रकार से जाप करते हैं कि केवल उन्हें ही सुनाई देता है उन्हें हम उपांशु कहते हैं। जिस जाप…
मंत्र साधना के लिए तिथि विचार
मानव जीवन को दो भागों में बांटा गया है:- १. शुभ २. अशुभ इन दोनों पक्षों की नीव केवल तिथियां हैं, यदि हम तिथियों को विचार कर कोई काम करते हैं, तो हमें कोई चिंता नहीं होती इसलिए पहले तिथियों का ज्ञान प्राप्त करो। तिथियां पाँच प्रकार की होती हैं:- १. नन्दा…
दिशा शूल
उत्तर दिशा : मंगलवार और बुधवार को नही जाना चाहिए पश्चिम दिशा : रविवार और शुक्रवार को नही जाना चाहिए पूर्व दिशा : सोमवार और शनिवार को नही जाना चाहिए दक्षिण दिशा : गुरुवार को नही जाना…
मूलाधार चक्र
मूलाधार चक्र आज हम आपको पहले चक्र अर्थात मूलाधार चक्र के बारे में बताएंगे मूलाधार चक्र दो शब्दों से मिलकर बना है मूल प्लस आधार जहाँ पर मूल का अर्थ जड़ और आधार का अर्थ नींव होता है मनुष्य शरीर का निर्माण उसकी माँ के गर्भ से होता है तो उसकी जड़ें बही से होती…
अश्विनी नक्षत्र (Beta Arietos)
यही यजुर्वेदीओं का विशेष विवाह नक्षत्र है इस प्रथम नक्षत्र के देवता अश्वनी कुमार हैं जो देवताओं के चिकित्सक है शरद पूर्णिमा का चंद्र इसी नक्षत्र में होता है अतः इसे शारदीय नक्षत्र भी कहते हैं यह घोड़े के मुख्य आकार का 3 तारों का पुंज होता है इस नक्षत्र…
नक्षत्र
भारतीय पंचांग का तीसरा अंग है नक्षत्र अर्थात जिनका छरण नहीं होता वह नक्षत्र कहलाते हैं नक्षत्र सदैव अपने स्थान पर ही रहते हैं जबकि ग्रह नक्षत्रों में संचार करते हैं नक्षत्रों की संख्या प्राचीन काल में 24 थी जो आजकल 27 है भूत ज्योतिष में अभिजीत नक्षत्र को…
समयसूचक AM और PM का उद्गम
समयसूचक AM और PM का उद्गम*भारत ही था। पर हमें बचपन से यह रटवाया गया, विश्वास दिलवाया गया कि इन दो शब्दों AM और PM का मतलब होता है : AM : एंटी मेरिडियन (ante meridian)PM : पोस्ट मेरिडियन (post meridian) एंटी यानि पहले, लेकिन किसके? पोस्ट यानि बाद में,…