स्वर्णाकर्षणभैरवस्तोत्रम्
स्वर्णाकर्षणभैरवस्तोत्रम् ॐ अस्य श्रीस्वर्णाकर्षणभैरवस्तोत्रं मन्त्रस्य बह्मऋषिः अनुष्टुप् छन्दः श्रीस्वर्णाकर्षणभैरवदेवता ह्रीं बीजं क्लीं शक्तिः सः कीलकं मम दारिद्र्य नाशार्थे पाठ विनियोगः । ऋष्यादिन्यासः :- ब्रह्मर्षये नमः शिरसि । अनुष्टुप्छन्दसे नमः…
सर्वारिष्ट निवारण स्तोत्र
सर्वारिष्ट निवारण स्तोत्र ॐ गं गणपतये नमः। सर्व-विघ्न-विनाशनाय, सर्वारिष्ट निवारणाय, सर्व-सौख्य-प्रदाय, बालानां बुद्धि-प्रदाय, नाना-प्रकार-धन-वाहन-भूमि-प्रदाय, मनोवांछित-फल-प्रदाय रक्षां कुरू कुरू स्वाहा।। ॐ गुरवे नमः, ॐ श्रीकृष्णाय नमः, ॐ बलभद्राय नमः,…
श्री कामदेव का मन्त्र
श्री कामदेव का मन्त्र (मोहन करने का अमोघ शस्त्र) “ॐ नमो भगवते काम-देवाय श्रीं सर्व-जन-प्रियाय सर्व-जन-सम्मोहनाय ज्वल-ज्वल, प्रज्वल-प्रज्वल, हन-हन, वद-वद, तप-तप, सम्मोहय-सम्मोहय, सर्व-जनं मे वशं कुरु-कुरु स्वाहा।” विधीः- उक्त मन्त्र का २१,००० जप करने से…
श्री भैरव शाबर मंत्र
श्री भैरव मन्त्र “ॐ गुरुजी काला भैरुँ कपिला केश, काना मदरा, भगवाँ भेस। मार-मार काली-पुत्र। बारह कोस की मार, भूताँ हात कलेजी खूँहा गेडिया। जहाँ जाऊँ भैरुँ साथ। बारह कोस की रिद्धि ल्यावो। चौबीस कोस की सिद्धि ल्यावो। सूती होय, तो जगाय ल्यावो। बैठा होय, तो…
मारुति स्तोत्रं
मारुतिस्तोत्रम् श्रीगणेशाय नम: ॥ ॐ नमो भगवते विचित्रवीरहनुमते प्रलयकालानलप्रभाप्रज्वलनाय । प्रतापवज्रदेहाय । अंजनीगर्भसंभूताय । प्रकटविक्रमवीरदैत्यदानवयक्षरक्षोगणग्रहबंधनाय । भूतग्रहबंधनाय । प्रेतग्रहबंधनाय । पिशाचग्रहबंधनाय । शाकिनीडाकिनीग्रहबंधनाय ।…
६४ योगिनि
योगिनी अष्ट या चौंसठ योगिनि आदिशक्ति मां काली का अवतार है। घोर नामक दैत्य के साथ युद्ध करते हुए माता ने ये अवतार लिए थे। यह भी माना जाता है कि ये सभी माता पर्वती की सखियां हैं। इन चौंसठ देवियों में से दस महाविद्याएं और सिद्ध विद्याओं की भी गणना की जाती…
श्रीमद्भागवत महापुराण तृतीय स्कंध
तृतीय स्कंध तृतीय स्कंधका प्रारम्भ उद्धव एवं महात्मा विदुरकी भेंटकी कथासे होता है | द्वितीय स्कंधके अंतमें शौनकजी ने सूतजी से पूछा था कि हमें महात्मा विदुरजीका चरित्र सुनाइये और महात्मा विदुरको मैत्रेयजीने क्या उपदेश दिया, यह बताइये | ठीक ऐसा ही…
श्रीमद्भागवत महापुराण द्वतीय स्कंध
परीक्षितजीके दो प्रश्न प्रथम स्कंध के अंत में परीक्षित ने शुकदेव जी से दो मत्वपूर्ण प्रश्न किये थे | उन्होंने पूछा था कि जो लोग पुरुष सर्वथा मरणासन्न है, उसको क्या करना चाहिए और मनुष्यमात्र को अपने जीवन में क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए | इन्हीं…
श्रीमदभागवत कथा प्रथम स्कन्ध
प्रथम स्कन्ध भागवत के प्रथम स्कंध में उन्नीस अध्याय हैं | प्रथम स्कंध मंगलाचरण के साथ प्रारम्भ होता है इसमें वेदव्यास जी कहते है – ‘सत्यं परं धीमहि’ अर्थात परम सत्य रूप परमात्मा का हम ध्यान करते है | यहाँ वेदव्यास जी ने भगवान की किसी विग्रह का वर्णन नहीं…
श्रीमद्भागवत महात्म्यय विस्तृत
// ॐ नमो भगवते वासुदेवाय // भागवत का उद्देश्य एवं माहात्म्य श्रीमदभागवत महापुराण भारतीय सनातन संस्कृति का अत्यंत श्रेष्ठ…