गायत्री और ब्रह्म की एकता
गायत्री कोई स्वतंत्र देवी- देवता नहीं है ।। यह तो परब्रह्म परमात्मा का क्रिया भाग है ।। ब्रह्म निर्विकार है, अचिन्त्य है, बुद्धि से परे है, साक्षी रूप है, परन्तु अपनी क्रियाशील चेतना शक्ति रूप होने के कारण उपासनीय है और उस उपासना का अभीष्ट परिणाम भी…
गायत्री महाविद्या का तत्वदर्शन
नाभिपद्म भुवा विष्णेब्रह्मणानिर्मितं जगत् ।। स्थावरं जंगमं शक्त्या गायत्र्या एवं वै ध्रुवम॥ (विष्णोः) विष्णु की (नाभिपद्म भुवा) नाभि कमल से उत्पन्न हुए (ब्रह्मणा) ब्रह्मा ने (गायत्र्याः शक्त्या एव) गायत्री शक्ति से ही (स्थावरं जंगमं) जड़ तथा चेतन (जगत्)…
गायत्री महाविद्या
गायत्री साधना सदबुद्धि की आराधना- उपासना है ।। गाय को वेदों की माता- वेदमाता कहा जाता है ।। वेद शब्द का अर्थ है ”ज्ञान” ।। यह ज्ञान कल्याण (ऋक् ), पौरुष (यजु), क्रीड़ा (साम) एवं अर्थ (अथर्वण)- इन चार उपक्रमों के माध्यम से सृष्टि के हर जीवधारी…
सूर्य
सूर्य सूर्य (देवनागरी: सूर्य, sūrya) मुखिया है, सौर देवता, आदित्यों में से एक, कश्यप और उनकी पत्नियों में से एक अदिति के पुत्र, इंद्र का, या द्यौस पितर का (संस्करण पर निर्भर करते हुए). उनके बाल और हाथ स्वर्ण के हैं। उनके रथ को सात घोड़े खींचते हैं, जो…
श्री साँई चालीसा
श्री साँई चालीसा श्री साँई के चरणों में, अपना शीश नवाऊं मैंकैसे शिरडी साँई आए, सारा हाल सुनाऊ मैं कौन है माता, पिता कौन है, यह न किसी ने भी जाना। कहां जन्म साँई ने धारा, प्रश्न पहेली रहा बना कोई कहे अयोध्या के, ये रामचन्द्र भगवान हैं। कोई कहता साँई बाबा,…
श्री काली चालीसा
श्री काली चालीसा ॥॥दोहा ॥॥ जयकाली कलिमलहरण, महिमा अगम अपार महिष मर्दिनी कालिका, देहु अभय अपार ॥ अरि मद मान मिटावन हारी । मुण्डमाल गल सोहत प्यारी ॥ अष्टभुजी सुखदायक माता । दुष्टदलन जग में विख्याता ॥1॥ भाल विशाल मुकुट छवि छाजै । कर में शीश शत्रु का साजै ॥…
श्री शनि चालीसा
श्री शनि चालीसा ॥दोहा॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल। दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज। करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥ जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥ चारि भुजा, तनु श्याम…
पार्वती जी की चालीसा
पार्वती जी की चालीसा ॥ दोहा ॥ जय गिरी तनये डग्यगे शम्भू प्रिये गुणखानी गणपति जननी पार्वती अम्बे ! शक्ति ! भवामिनी ॥ चालीसा॥ ब्रह्मा भेद न तुम्हरे पावे , पांच बदन नित तुमको ध्यावे शशतमुखकाही न सकतयाष तेरो , सहसबदन श्रम करात घनेरो ।।1।। तेरो पार न पाबत…
खाटू श्याम चालीसा
दोहा श्री गुरु चरण ध्यान धर, सुमिरि सच्चिदानन्द। श्याम चालीसा भजत हूँ, रच चैपाई छन्द।। चौपाई श्याम श्याम भजि बारम्बारा,सहज ही हो भवसागर पारा। इन सम देव न दूजा कोई, दीन दयालु न दाता होई। भीमसुपुत्र अहिलवती जाया, कहीं भीम का पौत्र कहाया। यह सब कथा सही…
चामुण्डा देवी की चालीसा
चामुण्डा देवी की चालीसा दोहा नीलवरण मा कालिका रहती सदा प्रचंड । दस हाथो मई ससत्रा धार देती दुस्त को दांड्ड़ ।। मधु केटभ संहार कर करी धर्म की जीत । मेरी भी बढ़ा हरो हो जो कर्म पुनीत ।। चौपाई नमस्कार चामुंडा माता । तीनो लोक मई मई विख्याता ।।…