कौस्तुभ मणि
9. कौस्तुभ मणि : मंथन के दौरान 5वां रत्न था कौस्तुभ मणि। कौस्तुभ मणि को भगवान विष्णु धारण करते हैं। महाभारत में उल्लेख है कि कालिय नाग को श्रीकृष्ण ने गरूड़ के त्रास से मुक्त किया था। उस समय कालिय नाग ने अपने मस्तक से उतारकर श्रीकृष्ण को कौस्तुभ मणि दे…
पाञ्चजन्य
8. पाञ्चजन्य : महाभारत में कृष्ण के पास पाञ्चजन्य, अर्जुन के पास देवदत्त, युधिष्ठिर के पास अनंतविजय, भीष्म के पास पोंड्रिक, नकुल के पास सुघोष, सहदेव के पास मणिपुष्पक था। सभी के शंखों का महत्व और शक्ति अलग-अलग थी। शंखों की शक्ति और चमत्कारों का वर्णन…
स्यमंतक मणि
7. स्यमंतक मणि : कुछ लोग कोहिनूर को ही स्यमंतक मणि मानते हैं। हालांकि इसमें कितनी सच्चाई है यह हम नहीं जानते। सबसे पहले यह मणि इन्द्रदेव के पास थी। वे इसे धारण करते थे। इन्द्रदेव ने यह मणि सूर्यदेव को दे दी थी। बहुत काल के बाद यह मणि राजा सत्राजित के पास…
अश्वत्थामा की मणि
6. अश्वत्थामा की मणि : मणि एक प्रकार का चमकता हुआ पत्थर होता है। मणि को हीरे की श्रेणी में रखा जा सकता है। इन्हीं में से कुछ मणियां चमत्कारिक थीं। जिसके भी पास मणि होती थी वह कुछ भी कर सकता था। रावण ने कुबेर से चंद्रकांत नाम की मणि छीन ली थी। वहीं…
पारसमणि
5. पारसमणि : पारसमणि का जिक्र पौराणिक और लोककथाओं में खूब मिलता है। इसके हजारों किस्से और कहानियां समाज में प्रचलित हैं। कई लोग यह दावा भी करते हैं कि हमने पारसमणि देखी है। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में जहां हीरे की खदान है, वहां से 70 किलोमीटर दूर दनवारा…
दिव्य धनुष और तरकश
दिव्य धनुष और तरकश : दधीचि ऋषि ने देश के हित में अपनी हड्डियों का दान कर दिया था। उनकी हड्डियों से 3 धनुष बने- 1. गांडीव, 2. पिनाक और 3. सारंग। इसके अलावा उनकी छाती की हड्डियों से इंद्र का वज्र बनाया गया। इन्द्र ने यह वज्र कर्ण को दे दिया था। पिनाक शिव…
कर्ण के कवच-कुंडल
कर्ण के कवच-कुंडल : भगवान कृष्ण यह भली-भांति जानते थे कि जब तक सूर्य से प्राप्त कर्ण के पास उसका कवच और कुंडल है, तब तक उसे कोई नहीं मार सकता। ऐसे में अर्जुन की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं। उधर देवराज इन्द्र भी चिंतित थे, क्योंकि अर्जुन उनका पुत्र था। तब…
अक्षय पात्र
अक्षय पात्र : अक्सर यह चमत्कारिक अक्षय पात्र प्राचीन ऋषि-मुनियों के पास हुआ करता था। अक्षय का अर्थ जिसका कभी क्षय या नाश न हो। दरअसल, एक ऐसा पात्र जिसमें से कभी भी अन्न और जल समाप्त नहीं होता। जब भी उसमें हाथ डालो तो खाने की मनचाही वस्तु निकाली जा सकती…
कल्पवृक्ष
1. कल्पवृक्ष : वेद और पुराणों में कल्पवृक्ष का उल्लेख मिलता है। कल्पवृक्ष स्वर्ग का एक विशेष वृक्ष है। पौराणिक धर्मग्रंथों और हिन्दू मान्यताओं के अनुसार यह माना जाता है कि इस वृक्ष के नीचे बैठकर व्यक्ति जो भी इच्छा करता है, वह पूर्ण हो जाती है। पुराणों…
नागा साधुओं का इतिहास, सम्पूर्ण जानकारी और तथ्य |
नागा साधुओं का इतिहास, सम्पूर्ण जानकारी और तथ्य | सभी साधुओं में नागा साधुओं को सबसे ज्यादा हैरत और अचरज से देखा जाता है। यह आम जनता के बीच एक कौतुहल का विषय होते है। यदि आप यह सोचते है की नागा साधु बनना बड़ा आसान है तो यह आपकी गलत सोच है। नागा साधुओं…