द्वादश स्कन्ध
द्वादश स्कन्ध में कलियुग क े राजा व अनीति वर्णन , सम्भल ग्राम में विष्णुयश ब्रह्मण दम्पती के गृहे कल्कि अवतार l भागवत के सार (निचोड़) का वर्णन है। कलि के दोषों से बचने के उपाये– केवल ‘नामसंकीर्तन’ है। मृत्यु तो परीक्षित जी को आई ही नहीं क्योकि उन्होंने उसके पहले ही समाधि लगाकर स्वंय को भगवान में लीन कर दिया था उनकी परमगति हुई क्योकि जिसने इस भागवत रूपी अमृत का पान कर लिया हो उसे मृत्यु कैसे आ सकती थी।