एकादश स्कन्ध में भगवान ने अपने ही यदुवंश कों ऋषियों का श्राप लगाकर यह बताया की गलती चाहे कोई भी करे मेरे अपने भी उसको अपनी करनी का फल भोगना पड़ेगा. भगवान की माया बड़ी प्रबल है उससे पार होने के उपाय केवल भगवान की भक्ति है,यही इस एकादश स्कन्ध का सार है. अवधूतोपख्यान – २४ गुरुओं की कथा शिक्षायें है।