द्वादश स्कन्ध

द्वादश स्कन्ध में कलियुग क े राजा व अनीति वर्णन , सम्भल ग्राम में विष्णुयश ब्रह्मण दम्पती के गृहे कल्कि अवतार l भागवत के सार (निचोड़) का  वर्णन है। कलि के दोषों से बचने के उपाये– केवल ‘नामसंकीर्तन’ है। मृत्यु तो परीक्षित जी को आई ही नहीं क्योकि उन्होंने उसके पहले ही समाधि लगाकर स्वंय को भगवान में लीन कर दिया था उनकी परमगति हुई क्योकि जिसने इस भागवत रूपी अमृत का पान कर लिया हो उसे मृत्यु कैसे आ सकती थी।

                                                  श्रीमद्भागवत महापुराण कथा
कथा महात्म्य प्रथम स्कंध द्वितीय स्कंध तृतीय स्कंध
चतुर्थ स्कंध पंचम स्कंध षष्ठम स्कन्ध सप्तम स्कंध
अष्टम स्कंध नवम स्कंध दशम स्कन्ध (पूर्वार्ध) दशम स्कन्ध (उत्तरार्ध)
एकादश स्कन्ध द्वादश स्कन्ध श्रीमद्भागवतमाहात्म्य

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