श्री अच्युताष्टकं
श्री अच्युताष्टकं अथ श्री अच्युताष्टकं ।। अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम् || श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकीनायकं रामचन्द्रं भजे ||१|| अच्युतं केशवं सत्यभामाधवं माधवं श्रीधरं राधिकाराधितम् || इन्दिरामन्दिरं चेतसा सुन्दरं देवकीनन्दनं…
सप्तश्लोकी श्री दुर्गा कवचम्
सप्तश्लोकी श्री दुर्गा कवचम्- अथ सप्तश्लोकी श्री दुर्गा कवचम् :- श्रृणु देवि प्रवक्ष्यामि कवचं सर्वसिद्धिदम् । पठित्वा पाठयित्वा च नरो मुच्येत संकटात् ॥ १॥ अज्ञात्वा कवचं देवि दुर्गामंत्रं च यो जपेत् । स नाप्नोति फलं तस्य परं च नरकं व्रजेत् ॥ २॥ उमादेवी…
श्रीरामरक्षास्तोत्रम्
श्रीरामरक्षास्तोत्रम् ।। अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमंत्रस्य, बुधकौशिक ऋषिः श्रीसीतारामचंद्रो देवता, अनुष्टुप् छंदः सीता शक्तिः श्रीमद् हनुमान कीलकम् श्रीरामचंद्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्तोत्रजपे विनियोगः ।। अथ ध्यानम् ।। ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं…
नवरात्रि में कैसे करें मां दुर्गा का पूजन
नवरात्रि में कैसे करें मां दुर्गा का पूजन सबसे पहले आसन पर बैठकर जल से तीन बार शुद्ध जल से आचमन करे- ॐ केशवाय नम:, ॐ माधवाय नम:, ॐ नारायणाय नम: फिर हाथ में जल लेकर हाथ धो लें। हाथ में चावल एवं फूल लेकर अंजुरि बांध कर दुर्गा देवी का ध्यान करें। आगच्छ त्वं…
षोडशोपचार पूजन
षोडशोपचार पूजन षोडशोपचार पूजन में निम्न सोलह तरीके से विधिपूर्वक पूजन किया जाता है | ध्यान-आवाहन– मन्त्रों और भाव द्वारा भगवान का ध्यान किया जाता है | आवाहन का अर्थ है पास लाना। ईष्ट देवता को अपने सम्मुख या पास लाने के लिए आवाहन किया जाता है। ईष्ट देवता…
मॉस, मैथुन, मदिरा का क्यों करते है अघोरी प्रयोग
मॉस, मैथुन, मदिरा का क्यों करते है अघोरी प्रयोग:- “मां काली” के विकराल रूप को देखकर कोई भी इंसान भयभीत हो सकता है लेकिन समस्त देवी-देवताओं में से मां काली को ही एक ऐसी देवी के नाम से जाना जाता है, जिनके क्रोध को शांत करना बेहद मुश्किल है। लेकिन क्या कभी…
संजीवनी बूटी
10. संजीवनी बूटी : यह एक ऐसी जड़ी है जिसको खाने से जब तक उसका असर रहता है, तब तक व्यक्ति गायब रहता है। यह एक ऐसी बूटी है जिसका सेवन करने से व्यक्ति को भूत-भविष्य का ज्ञान हो जाता है। क्या सचमुच ऐसा है? क्या संजीवनी बूटी होती है? आजकल वैज्ञानिक पारे,…
कौस्तुभ मणि
9. कौस्तुभ मणि : मंथन के दौरान 5वां रत्न था कौस्तुभ मणि। कौस्तुभ मणि को भगवान विष्णु धारण करते हैं। महाभारत में उल्लेख है कि कालिय नाग को श्रीकृष्ण ने गरूड़ के त्रास से मुक्त किया था। उस समय कालिय नाग ने अपने मस्तक से उतारकर श्रीकृष्ण को कौस्तुभ मणि दे…
पाञ्चजन्य
8. पाञ्चजन्य : महाभारत में कृष्ण के पास पाञ्चजन्य, अर्जुन के पास देवदत्त, युधिष्ठिर के पास अनंतविजय, भीष्म के पास पोंड्रिक, नकुल के पास सुघोष, सहदेव के पास मणिपुष्पक था। सभी के शंखों का महत्व और शक्ति अलग-अलग थी। शंखों की शक्ति और चमत्कारों का वर्णन…
स्यमंतक मणि
7. स्यमंतक मणि : कुछ लोग कोहिनूर को ही स्यमंतक मणि मानते हैं। हालांकि इसमें कितनी सच्चाई है यह हम नहीं जानते। सबसे पहले यह मणि इन्द्रदेव के पास थी। वे इसे धारण करते थे। इन्द्रदेव ने यह मणि सूर्यदेव को दे दी थी। बहुत काल के बाद यह मणि राजा सत्राजित के पास…