प्रदोष व्रत (PRADOSH VRAT)
प्रदोष का अर्थ है रात्रि का शुभ आरम्भ|इस व्रत के पूजन का विधान इसी समय होता है| इसलिए इसे प्रदोष व्रत कहते हैं| यह व्रत शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को किया जाता हैं| इसका उदेशय संतान की कामना है|इस व्रत को स्त्री पुरुष दोनों ही कर सकते हैं| इस…
रविवार (इतवार) व्रत (RAVIVAR VRAT)
सर्व मनोकामनाओ की पूर्ति हेतु रविवार का वर्त श्रेस्ठ है| विधि: प्रात: काल सनानादी से निवृत हो स्वछ वस्त्र धारण करे | शांतचित होकर परमात्मा का स्मरण करे | भोजन इक समय से ज्यादा नहीं करना चहिये | भोजन तथा फलाहार सूर्य के प्रकाश रहते कर लेना चहिये | यदि…
शनिवार व्रत की आरती (SHANIVAR VART KI AARTI)
शनि व्रत रखने का बहुत महत्व माना गया है| कुंडली में शनि की महादशा अथवा साढ़े साती या ढैय्या में शनि जी के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए शनि व्रत का महत्व माना गया है| शनि जी के इस मंत्र – ‘ऊँ शं शनिश्चराय नम:” को कम से कम 108 बार जाप करना…
भक्त शेख फरीद जी (BHAGAT SHEK FARID JI)
देखु फरीद जु थीआ दाड़ी होई भूर || अगहु नेड़ा आइआ पिछा रहिआ दूरि || १ || शेख फरीद जिनका पूरा नाम फरीद मसऊद शकर गंज था|शेख फरीद जी का जन्म 1172 ई० में गाँव खोतवाल जिला मुल्तान में हुआ| इनके पिता का नाम शेख जमान सुलेमान तथा माता का नाम मरियम…
भक्त ध्रुव जी (BHAGAT DHRUV JI)
भक्त ध्रुव जी भूमिका: जो भक्ति करता है वह उत्तम पदवी, मोक्ष तथा प्रसिद्धि प्राप्त करता है| यह सब भगवान की लीला है| सतियुग में एक ऐसे ही भक्त हुए हैं जिनका नाम ध्रुव था| परिचय: भक्त ध्रुव जी का जन्म राजा उतानपाद के महल में हुआ| राजा की दो रानियाँ थी|…
श्री गंगा जी की स्तुति (SHRI GANGA STUTI)
गांगं वारि मनोहारि मुरारिचरणच्युतम् । त्रिपुरारिशिरश्चारि पापहारि पुनातु माम् ।।
हनुमान दर्शन हेतु मंत्र – HANUMAN DARSHAN HETU MANTRA
श्रीहनुमान् जी विद्या, बुद्धि, ज्ञान तथा पराक्रमीकी मूर्ति हैं| जबतक पृथ्वीपर श्रीरामकथा रहेगी, तबतक श्रीहनुमान् जीको इस धरा-धामपर रहनेका श्रीरामसे वरदान प्राप्त है| आज भी ये समय-समयपर श्रीरामभक्तोंको दर्शन देकर उन्हें कृतार्थ किया करते हैं| हनुमान दर्शन…