शनिवार व्रत की आरती (SHANIVAR VART KI AARTI)

शनि व्रत रखने का बहुत महत्व माना गया है| कुंडली में शनि की महादशा अथवा साढ़े साती या ढैय्या में शनि जी के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए शनि व्रत का महत्व माना गया है| शनि जी के इस मंत्र – ‘ऊँ शं शनिश्चराय नम:” को कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए| शनि व्रत में शनि देव की आरती के साथ साथ दान भी जरूरी है| उड़द, तेल, तिल, नीलम रत्न, काली गाय, भैंस, काला कम्बल या कपड़ा, लोहा या इससे बनी वस्तुएं और दक्षिणा किसी ब्राह्मण को दान करना चाहिए।

शनिवार व्रत की आरती (Shanivar Vart Ki Aarti)

शनिवार व्रत की आरती इस प्रकार है:

चार भुजा तहि छाजै, गदा हस्त प्यारी | जय ०
रवि नंदन गज वंदन,यम अग्रज देवा |

कष्ट न सो नर पाते, करते तब सेना | जय ०
तेज अपार तुम्हारा, स्वामी सहा नहीं जावे |

तुम से विमुख जगत में,सुख नहीं पावे | जय ०
नमो नमः रविनंदन सब ग्रह सिरताजा |

बंशीधर यश गावे रखियो प्रभु लाज | जय ०

शनिवार वर्त की विधि इस प्रकार है:

  • इस दिन शनि की पूजा होती है |
  • काला तिल, काला वस्त्र, तेल, उड़द शनि को बहुत प्रिय है |
  • शनि की पूजा भी इनके द्वारा की जाती है |
  • शनि की दशा को दूर करने के लिए यह व्रत किया जाता है |
  • शनि सत्रोत का पाठ भी विशेष लाभदायक सिद्ध होता है |

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