श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ सप्तदशोऽध्यायः- श्रद्धात्रयविभागयोग
श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ सप्तदशोऽध्यायः- श्रद्धात्रयविभागयोग (श्रद्धा का और शास्त्रविपरीत घोर तप करने वालों का विषय) अर्जुन उवाच ये शास्त्रविधिमुत्सृज्य यजन्ते श्रद्धयान्विताः। तेषां निष्ठा तु का कृष्ण सत्त्वमाहो रजस्तमः॥ भावार्थ : अर्जुन बोले- हे कृष्ण!…
श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ षोडशोऽध्यायः- दैवासुरसम्पद्विभागयोग
श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ षोडशोऽध्यायः- दैवासुरसम्पद्विभागयोग (दैवीय स्वभाव वालों के लक्षण) श्रीभगवानुवाच अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः । दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम् ॥ (१) भावार्थ : श्री भगवान ने कहा - हे भरतवंशी अर्जुन! परमात्मा पर…
श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ पञ्चदशोऽध्यायः- पुरुषोत्तमयोग
श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ पञ्चदशोऽध्यायः- पुरुषोत्तमयोग (संसार रूपी वृक्ष का वर्णन) श्रीभगवानुवाच ऊर्ध्वमूलमधः शाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम् । छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित् ॥ (१) भावार्थ : श्री भगवान ने कहा – हे अर्जुन! इस संसार को अविनाशी…
श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ चतुर्दशोऽध्यायः- गुणत्रयविभागयोग
श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ चतुर्दशोऽध्यायः- गुणत्रयविभागयोग (प्रकृति और पुरुष द्वारा जगत् की उत्पत्ति) श्रीभगवानुवाच परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानं मानमुत्तमम् । यज्ज्ञात्वा मुनयः सर्वे परां सिद्धिमितो गताः ॥ (१) भावार्थ : श्री भगवान ने कहा – हे…
श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ त्रयोदशोऽध्यायः क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोगो
श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ त्रयोदशोऽध्यायः क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोगो (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ का विषय) अर्जुन उवाच प्रकृतिं पुरुषं चैव क्षेत्रं क्षेत्रज्ञमेव च । एतद्वेदितुमिच्छामि ज्ञानं ज्ञेयं च केशव ॥ (१) भावार्थ : अर्जुन ने पूछा – हे केशव! मैं आपसे…
श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ द्वादशोऽध्यायः- भक्तियोग
श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ द्वादशोऽध्यायः- भक्तियोग (साकार और निराकार रूप से भगवत्प्राप्ति) अर्जुन उवाच एवं सततयुक्ता ये भक्तास्त्वां पर्युपासते । ये चाप्यक्षरमव्यक्तं तेषां के योगवित्तमाः ॥ (१) भावार्थ : अर्जुन ने पूछा – हे भगवन! जो विधि आपने बतायी है…
श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ एकादशोऽध्यायः- विश्वरूपदर्शनयोग
श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ एकादशोऽध्यायः- विश्वरूपदर्शनयोग (अर्जुन द्वारा विश्वरूप के दर्शन के लिये प्रार्थना) अर्जुन उवाच मदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसञ्ज्ञितम् । यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं विगतो मम ॥ (१) भावार्थ : अर्जुन ने कहा – मुझ पर कृपा करने…
श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ दशमोऽध्याय:- विभूतियोग
श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ दशमोऽध्याय:- विभूतियोग (भगवान की ऎश्वर्य पूर्ण योग-शक्ति) श्रीभगवानुवाच भूय एव महाबाहो श्रृणु मे परमं वचः । यत्तेऽहं प्रीयमाणाय वक्ष्यामि हितकाम्यया ॥ (१) भावार्थ : श्री भगवान् ने कहा – हे महाबाहु अर्जुन! तू मेरे…
श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ नवमोऽध्यायः- राजविद्याराजगुह्ययोग
श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ नवमोऽध्यायः- राजविद्याराजगुह्ययोग (सृष्टि का मूल कारण) श्रीभगवानुवाच इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यनसूयवे । ज्ञानं विज्ञानसहितं यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात् ॥ (१) भावार्थ : श्री भगवान ने कहा – हे अर्जुन! अब मैं तुझ ईर्ष्या…
श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ अष्टमोऽध्यायः- अक्षरब्रह्मयोग
श्रीमद्भगवद्गीता:-अथ अथाष्टमोऽध्यायः- अक्षरब्रह्मयोग (अर्जुन के सात प्रश्नो के उत्तर) अर्जुन उवाच किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुषोत्तम। अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते॥ (१) भावार्थ : अर्जुन ने पूछा – हे पुरुषोत्तम! यह…