श्रीमद्भागवत महात्म्यय विस्तृत
// ॐ नमो भगवते वासुदेवाय // …
// ॐ नमो भगवते वासुदेवाय // …
कीर्तनोत्सव में उद्धव जी का प्रकट होना, श्रीमद्भागवत में विशुद्ध भक्ति,भगवान श्रीकृष्ण के नाम लीला गुण आदि का संकीर्तन किया जाये तो वे स्वयं ही हृदय में आ विराजते हैं और श्रवण,कीर्तन करने वाले के सारे दु:ख मिटा देते हैं…
द्वादश स्कन्ध में कलियुग क े राजा व अनीति वर्णन , सम्भल ग्राम में विष्णुयश ब्रह्मण दम्पती के गृहे कल्कि अवतार l भागवत के सार (निचोड़) का वर्णन है। कलि के दोषों से बचने के उपाये– केवल ‘नामसंकीर्तन’ है। मृत्यु…
एकादश स्कन्ध में भगवान ने अपने ही यदुवंश कों ऋषियों का श्राप लगाकर यह बताया की गलती चाहे कोई भी करे मेरे अपने भी उसको अपनी करनी का फल भोगना पड़ेगा. भगवान की माया बड़ी प्रबल है उससे पार होने…
दशम स्कन्ध उत्तरार्ध में भगवान की ‘ऐश्वर्य-लीला’ का वर्णन है- जहाँ भगवान ने वासुरी छोड़कर सुदर्शन चक्र धारण किया उनकी कर्मभूमि, रुक्मणि आदि आठ विवाह नित्यचर्या, गृहस्थ, का बड़ा ही अनुपम वर्णन है l मुचुकुन्द को दर्शन, शंबरासुर वध ,…
भागवत का ‘हृदय’ दशम स्कन्ध है बड़े-बड़े संत महात्मा, भक्त के प्राण है ये दशम स्कन्ध. भगवान अजन्मा है, उनका न जन्म होता है न मृत्यु, श्रीकृष्ण का तो केवल ‘प्राकट्य’ होता है, भगवान का प्राकट्य किसके जीवन में, और…
नवम स्कन्ध में ‘सूर्ये-वंश’ में वैवस्वत मनु के पुत्र राजा की सुद्युम्न की, च्यवन और सुकन्या की, नाभाग के अम्बरीष की, इक्ष्वाकु वंश , हरिश्चन्द्र की राजामान्धाता की ,राजा सगर साठ हजार पुत्र कपिल श्राप के कारण गंगावतरण भगीरथ के…
भगवान कैसे भक्त के चरण पकडे़ हुए व्यक्ति का पहले, बाद में भक्त का उद्धार करते है ये ‘गजेन्द्र-ग्राह कथा’के माध्यम से बताया गया है. ‘समुद्र मंथन’, ‘मोहिनी अवतार’, देवासुर संग्राम ‘वामन अवतार’, के माध्यम से भगवान की भक्ति और…
सप्तम स्कन्ध में शिशुपाल और दन्तवक्त्र के पूर्व जन्म, राजासुयज्ञ की कथा , नृसिंह अवतार ‘प्रहलाद-चरित्र’ के माध्यम से बताया गया है कि हजारों मुसीबत आने पर भी भगवान का नाम न छूटे, यदि भगवान का बैरी पिता ही क्यों…
षष्ट स्कन्ध मे भगवान के नाम की महिमा’ के सम्बन्ध में ‘अजामिलोपाख्यान’ आतुर काल (मरणासन्न काल) में भगवान् के नारायण नाम के उच्चारण से अजामिल जैसे पापी का उद्धार हो जाता है। नारद को दक्ष का श्राप ‘नारायण कवच’ का वर्णन…