नवम स्कन्ध में ‘सूर्ये-वंश’
में वैवस्वत मनु के पुत्र राजा की सुद्युम्न की, च्यवन और सुकन्या की, नाभाग के अम्बरीष की, इक्ष्वाकु वंश , हरिश्चन्द्र की राजामान्धाता की ,राजा सगर साठ हजार पुत्र कपिल श्राप के कारण गंगावतरण
भगीरथ के दिलीप के रघु के अज के इन्दुमती से दशरथ की तीन( कौशल्या आदि रानियों के राम, लक्षमण,भरत,शत्रुघ्न
सभी के दो दो पुत्र
ययाति की कथा
राम के पुत्र कुश के वंश में मरू राजा जो आज भी कलाप ग्राम में तप कर रहें कल्कि अवतार होने तक ….
‘चंद्र-वंश’ की कथाओं के माध्यम से उन राजाओ का वर्णन है भृगु वंश जिनकी भक्ति के कारण भगवान ने उनके वंश में जन्म लिया। जिसका चरित्र सुनने मात्र से जीव पवित्र हो जाता है l परशुराम जी का पावन चरित्र l
निमिवंश राजाजनक , भरतवंश और रन्तिदेव और पांचाल , कुरु , मगध राज वंश , तर्वसु आदि , विदर्भ वंश , वृषणी वंश वर्णन , यही इस स्कन्ध का सार है।