भक्त शेख फरीद जी (BHAGAT SHEK FARID JI)

देखु फरीद जु थीआ दाड़ी होई भूर ||  अगहु नेड़ा आइआ पिछा रहिआ दूरि || १ ||         शेख फरीद जिनका पूरा नाम फरीद मसऊद शकर गंज था|शेख फरीद जी का जन्म 1172 ई० में गाँव खोतवाल जिला मुल्तान में…

भक्त ध्रुव जी (BHAGAT DHRUV JI)

भक्त ध्रुव जी  भूमिका: जो भक्ति करता है वह उत्तम पदवी, मोक्ष तथा प्रसिद्धि प्राप्त करता है| यह सब भगवान की लीला है| सतियुग में एक ऐसे ही भक्त हुए हैं जिनका नाम ध्रुव था|    परिचय: भक्त ध्रुव जी…

हनुमान दर्शन हेतु मंत्र – HANUMAN DARSHAN HETU MANTRA

श्रीहनुमान् जी विद्या, बुद्धि, ज्ञान तथा पराक्रमीकी मूर्ति हैं| जबतक पृथ्वीपर श्रीरामकथा रहेगी, तबतक श्रीहनुमान् जीको इस धरा-धामपर रहनेका श्रीरामसे वरदान प्राप्त है| आज भी ये समय-समयपर श्रीरामभक्तोंको दर्शन देकर उन्हें कृतार्थ किया करते हैं| हनुमान दर्शन हेतु मंत्र ॐ…

महायोगी गुरु गोरखनाथ जी का इतिहास

                       महायोगी गुरु गोरखनाथ सिद्ध गोरक्षनाथ को प्रणाम सिद्धों की भोग-प्रधान योग-साधना की प्रतिक्रिया के रूप में आदिकाल में नाथपंथियों की हठयोग साधना आरम्भ हुई। इस पंथ को चलाने वाले…

क्या है इच्छाशक्ति का मूल?

इस दुनिया में विद्युत की प्रकृति अभी तक एक रहस्य है, किंतु मनुष्य ने उससे लाभ उठाने के हजारों मार्ग खोज लिए हैं। विद्युत प्रकृति में सर्वत्र पाई जाती है, किंतु इसे प्राप्त कर एकत्र करना, उसका भंडारण करना तथा…

तँत्र विद्या की उपयोगिता

प्रकृति अनन्त शक्तियों का भण्डार है । वैज्ञानिकों ने वायुयान, रेडियो, विद्युत, वाष्प आदि के अनेक आश्चर्य जनक आविष्कार किये हैं और नित्यप्रति होते जा रहे हैं पर प्रकृति का शक्ति भण्डार अनन्त और अपार है कि धुरधंर वैज्ञानिक अब…

शिव का स्वरूप

शिव की महिमा अनंत है। उनके रूप, रंग और गुण अनन्य हैं। समस्त सृष्टि शिवमयहै। सृष्टि से पूर्व शिव हैं और सृष्टि के विनाश के बाद केवल शिव ही शेष रहते हैं। ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मा ने सृष्टि…

दुनिया के सात पाप

यह सवाल हमेशा कौंधता रहा है कि पाप क्या है और पुण्य क्या है? इससे भी बढ़कर कि पापों में भी महापाप क्या हैं। हर धर्म ने इसकी अपनी व्याख्या की है। जब से मनुष्य ने होश संभाला है तभी…

गोगा जी महाराज(सिद्धनाथ वीर गोगादेव)

राजस्थान के सिद्धों के सम्बन्ध में एक चर्चित दोहा है : ‘‘पाबू, हडबू, रामदे, माँगलिया, मेहा। पाँचू पीर पधारज्यों, गोगाजी जेहा” सिद्ध वीर गोगादेव के जन्मस्थान, जो राजस्थान के चुरू जिले के दत्तखेड़ा (ददरेवा) में स्थित है। जहाँ पर सभी…