श्री सरस्वती चालीसा
श्री सरस्वती चालीसा (Shri Saraswati Chalisa in Hindi) ॥दोहा॥ जनक जननि पद्मरज, निज मस्तक पर धरि। बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥ पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु। दुष्जनों के पाप को, मातु तु ही अब हन्तु॥…
श्री सरस्वती चालीसा (Shri Saraswati Chalisa in Hindi) ॥दोहा॥ जनक जननि पद्मरज, निज मस्तक पर धरि। बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥ पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु। दुष्जनों के पाप को, मातु तु ही अब हन्तु॥…
भगवान श्री गणेश हिन्दू धर्म में प्रथम पूजनीय माने जाते हैं। विघ्नहर्ता श्री गणेश की पूजा हर शुभ कार्य के आरंभ में की जाती है, जिसे सारे कार्य सूख पूर्वक संपन्न हो जाते हैं। माना जाता है कि श्री गणेश की आराधना…
संकटमोचन हनुमानाष्टक हनुमान जी हिन्दू धर्म के भगवान है। हनुमान जी अपने भक्तों के कष्ट क्षण में दूर कर देते है इसलिए इन्हें संकटमोचन के नाम से जाना जाता है। यह हनुमान जी का आठ दोहा का मंत्र है। इस मंत्र…
हिन्दू धर्म में हनुमान जी को वीरता, भक्ति और साहस का परिचायक माना जाता है। शिवजी के रुद्रावतार माने जाने वाले हनुमान जी को बजरंग बली, पवनपुत्र, मारुती नंदन, केसरी आदि नामों से भी जाना जाता है। मान्यता है कि…
संतोषी माता को हिन्दू धर्म में गणेश जी की पुत्री माना जाता है, हालांकि इस बात का प्रमाण पुराणों में नहीं है। उत्तर भारत में माता संतोषी की पूजा के लिए शुक्रवार का व्रत करने का विधान है। शुक्रवार के…
श्री संतोषी माता आरती !! जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता, अपने सेवक जन को, सुख संपति दाता, जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता !! !! जय सुंदर, चीर सुनहरी, मां धारण कीन्हो, हीरा पन्ना दमके, तन श्रृंगार…
शुक्रवार व्रत कथा (Shukravar) शुक्रवार के दिन मां संतोषी का व्रत-पूजन किया जाता है। इस पूजा के अंत में माता की कथा सुनी जाती है। संतोषी माता और शुक्रवार व्रत की कथा निम्न है: संतोषी माता व्रत कथा (Santoshi Mata…
संतोषी माँ की व्रत पूजन विधि संतोषी माता को हिंदू धर्म में संतोष, सुख, शांति और वैभव की माता के रुप में पूजा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता संतोषी भगवान श्रीगणेश की पुत्री हैं. संतोष हमारे जीवन में…
शिव ताण्डव स्तोत्र जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले, गलेऽवलम्ब्यलम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्। डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं, चकारचंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम् ॥1॥ जटाकटाहसंभ्रममंभ्रमन्निलिंपनिर्झरी, विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि । धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके, किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥2॥ धराधरेंद्रनंदिनी विलासबंधुवंधुर-स्फुरद्दिगंतसंतति प्रमोद मानमानसे । कृपाकटाक्षधोरणीनिरुद्धदुर्धरापदि क्वचिद्विगम्बरे मनोविनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥ जटाभुजंगपिंगलस्फुरत्फणामणिप्रभा-कदंबकुंकुमद्रवप्रलिप्तदिग्वधूमुखे । मदांधसिंधुरस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे मनोविनोदमद्भुतं बिंभर्तुभूतभर्तरि ॥4॥ सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखर-प्रसूनधूलिधोरणी…
शिव वन्दना कर्पूरगौरं करुणावतारं, संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् । सदावसन्तं हृदयारविन्दे, भवं भवानीसहितं नमामि ॥1॥ मन्दारमालाकुलितालकायै कपालमालांकितकन्धराय। दिव्याम्बरायै च दिगम्बराय नम: शिवायै च नम: शिवाय॥2॥ श्री अखण्डानन्दबोधाय शोकसन्तापहारिणे। सच्चिदानन्दस्वरूपाय शंकराय नमो नम:॥3॥