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जिस महिला में हों ये 3 बुरी आदतें, उससे न करें विवाह, वर्ना हो जाएंगे तबाह

1.विवाह मनुष्य जीवन की एक आवश्यकता या महत्वपूर्ण बिंदु ही नहीं है। यह एक पवित्र यात्रा है जो एक दूसरे के सहयोग से ही पूर्ण होती है। विभिन्न ग्रंथों में विवाह के लिए अनेक नियम बताए गए हैं। इसमें योग्य…

इन 7 बुरी आदतों से लक्ष्मी छोड़ देती है साथ, होती है दुर्भाग्य की शुरुआत

कहा जाता है कि सुख-दुख इंसान के कर्मों के फल हैं। वह जैसा बीज बोता है उसे वैसा ही फल मिल जाता है। वास्तु, अध्यात्म और ज्योतिष आदि में सफल व सुखी जीवन के सूत्र इसीलिए बनाए गए हैं ताकि…

अप्सरा साधना

अप्सरा साधना : हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार अप्सरा देवलोक में रहने वाली अनुपम, अति सुंदर, अनेक कलाओं में दक्ष, तेजस्वी और अलौकिक दिव्य स्त्री है। वेद और पुराणों में उल्लेख मिलता है कि देवी, परी, अप्सरा, यक्षिणी, इन्द्राणी और पिशाचिनी…

दो शब्द साधना के वारे में

भारत में बहुत-सी ऐसी साधनाएं है जिनका धर्म से कोई नाता नहीं और कुछ का है। तांत्रिक साधनाओं को नकारात्मक या वाम साधनाओं की श्रेणी में रखा जाता है। गायत्री और योगसम्मत दक्षिणमार्गी साधनाएं होती है वैसे ही उनसे अलग…

जानिए भगवद् गीता के 9 बेहतरीन मैनेजमेंट सूत्र जिनमे छुपा है आपकी हर परेशानी का हल

Bhagavad Gita Slokas With Meaning in Hindi:  धर्म ग्रंथों के अनुसार मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इसलिए प्रतिवर्ष इस तिथि को गीता जयंती…

ब्राह्मणों को क्यों कहते हैं द्विज?

ब्राह्मणों का एक नाम द्विज भी है। पुरातन काल में इन्हें ‘द्विज’ कहकर भी संबोधित किया जाता था। द्विज का अर्थ है- 2 बार जन्म लेने वाला। सवाल यह है कि क्या वाकई ब्राह्मणों का 2 बार जन्म होता है?…

राशिनुसार करें देव पूजन, बनेंगे सारे बिगड़े काम…

* मनोवांछित फल पाने के लिए राशिनुसार करें देव पूजन…  यदि कोई जातक परेशान है और लाख प्रयत्नों के बाद भी उसके कार्यों में सफलता प्राप्त नहीं हो रही हो तो अपनी जन्म राशि के अनुसार देवपूजन करने से मनोवांछित…

सुख भौतिक है तो आनंद आध्यात्मिक…

इस संसार का सबसे बड़ा आकर्षण ‘आनंद’ है। हंसना-मुस्कुराना एक ऐसा वरदान है, जो वर्तमान में संतोष और भविष्य की शुभ-संभावनाओं की कल्पना को जन्म देकर मनुष्य का जीना सार्थक बनाता है। मुण्डकोपनिषद् में विद्वान ऋषि कहते हैं- ‘तद्विज्ञाने न…

क्या है इच्छाशक्ति का मूल?

इस दुनिया में विद्युत की प्रकृति अभी तक एक रहस्य है, किंतु मनुष्य ने उससे लाभ उठाने के हजारों मार्ग खोज लिए हैं। विद्युत प्रकृति में सर्वत्र पाई जाती है, किंतु इसे प्राप्त कर एकत्र करना, उसका भंडारण करना तथा…

तँत्र विद्या की उपयोगिता

प्रकृति अनन्त शक्तियों का भण्डार है । वैज्ञानिकों ने वायुयान, रेडियो, विद्युत, वाष्प आदि के अनेक आश्चर्य जनक आविष्कार किये हैं और नित्यप्रति होते जा रहे हैं पर प्रकृति का शक्ति भण्डार अनन्त और अपार है कि धुरधंर वैज्ञानिक अब…