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शिव का स्वरूप

शिव की महिमा अनंत है। उनके रूप, रंग और गुण अनन्य हैं। समस्त सृष्टि शिवमयहै। सृष्टि से पूर्व शिव हैं और सृष्टि के विनाश के बाद केवल शिव ही शेष रहते हैं। ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मा ने सृष्टि…

दुनिया के सात पाप

यह सवाल हमेशा कौंधता रहा है कि पाप क्या है और पुण्य क्या है? इससे भी बढ़कर कि पापों में भी महापाप क्या हैं। हर धर्म ने इसकी अपनी व्याख्या की है। जब से मनुष्य ने होश संभाला है तभी…

गोगा जी महाराज(सिद्धनाथ वीर गोगादेव)

राजस्थान के सिद्धों के सम्बन्ध में एक चर्चित दोहा है : ‘‘पाबू, हडबू, रामदे, माँगलिया, मेहा। पाँचू पीर पधारज्यों, गोगाजी जेहा” सिद्ध वीर गोगादेव के जन्मस्थान, जो राजस्थान के चुरू जिले के दत्तखेड़ा (ददरेवा) में स्थित है। जहाँ पर सभी…

समाधि Choiceless awareness।

यह बताना जरूरी नहीं कि कब कहाँ कैसे यह अनुभव हुआ। मगर समाधि निश्चय ही एक विरल घटना है। हमें नींद का पता है, हमें यह भी पता है कि कई बार आँख खुली होती है। दृश्य भी होता है…

शिव

शिव पुराण – कथा: अवतारों की कथा सागर-मंथन की कथा से शिव (shiva) का रूप निखरता है। ऋग्वेभद में जहॉ सूर्य, वरूण,वायु, अग्नि, इंद्र आदि प्रा‍कृतिक शक्तियों की उपासना है वहीं ‘रूद्र’ का भी उल्लेख है। पर विनाशकारी शक्तियों के…

राधा जी

राघाजी भगवान श्री कृष्ण की परम प्रिया हैं तथा उनकी अभिन्न मूर्ति भी। भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को बरसाना के श्री वृषभानु जी के यहां राघा जी का जन्म हुआ था। श्रीमद्देवी भागवत में कहा गया है…

पीलिया(Jaundice) का मंत्र

पीलिया(Jaundice) का मंत्र ॐ नमो आदेश गुरु का… श्रीराम सर साधा… लक्ष्मण साधा बाण… काला-पीला-रीता…. नीला थोथा पीला…. पीला चारों झड़े तो रामचंद्रजी रहै नाम…. मेरी भक्ति…. गुरु की शक्ति…. फुरे मंत्र ईश्वरोवाचा। काँसे के पात्र में जल भरकर, नीम…

त्वरिता शक्ति साधना

या श्री: स्वयम स्वकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मी: पापात्मनां कृतधियां हृद्येशु बुद्धि: | श्रृद्धा शतां कुलजन प्रभवस्य लज्जा, ता त्वां नतास्म परिपालय देवि विश्वं ||   जो महा शक्ति पुण्यात्माओं के गृह में लक्ष्मी स्वरुप में, पापियों के घर में दरिद्रता रूप में,…

अमोघ शिव गोरख प्रयोग

भगवान शिव का वर्णन करना भी क्या संभव है. एक तरफ वह भोलेपन की सर्व उच्चावस्था मे रह कर भोलेनाथ के रूप मे पूजित है वही दूसरी और महाकाल के रूम मे साक्षात प्रलय रुपी भी. निर्लिप्त स्मशानवासी हो कर…

grah dos nivaran sadhna

गुरु सत्यम गुरुर्शास्त्रं, गुरुर्वेदो  गुरुर्गति | गुरुमेव महत् सर्व तस्मै श्री गुरुवे नमः || गुरु ही सत्य है, गुरु ही शास्त्र है, गुरु ही वेद हैं और गुरु से ही गति प्राप्त हो सकती है, सही अर्थों में तो गुरु…