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बीसवीं पुतली – ज्ञानवती ~ राजा विक्रमादित्य तथा ज्ञानियों की कद्र

बीसवीं पुतली – ज्ञानवती ने जो कथा सुनाई वह इस प्रकार है- राजा विक्रमादित्य सच्चे ज्ञान के बहुत बड़े पारखी थे तथा ज्ञानियों की बहुत कद्र करते थे। उन्होंने अपने दरबार में चुन-चुन कर विद्वानों, पंडितों, लेखकों और कलाकारों को…

उन्नीसवी पुतली – रूपरेखा ~ राजा विक्रमादित्य और दो तपस्वी

उन्नीसवी पुतली – रूपरेखा नामक उन्नीसवी पुतली ने जो कथा सुनाई वह इस प्रकार है: राजा विक्रमादित्य के दरबार में लोग अपनी समस्याएँ लेकर न्याय के लिए तो आते ही थे कभी-कभी उन प्रश्नों को लेकर भी उपस्थित होते थे…

अठारहवीं पुतली – तारामती ~ विक्रमादित्य और विद्वानों तथा कलाकारों का सम्मान

अठारहवीं पुतली – तारामती की कथा इस प्रकार है- राजा विक्रमादित्य की गुणग्राहिता का कोई जवाब नहीं था। वे विद्वानों तथा कलाकारों को बहुत सम्मान देते थे। उनके दरबार में एक से बढ़कर एक विद्वान तथा कलाकार मौजूद थे, फिर…

सत्रहवीं पुतली – विद्यावती ~ विक्रमादित्य की परोपकार तथा त्याग की भावना!

सत्रहवीं पुतली – विद्यावती नामक ने जो कथा कही वह इस प्रकार है- महाराजा विक्रमादित्य की प्रजा को कोई कमी नहीं थीं। सभी लोग संतुष्ट तथा प्रसन्न रहते थे। कभी कोई समस्या लेकर यदि कोई दरबार आता था उसकी समस्या…

सोलहवीं पुतली – सत्यवती ~ राजा विक्रमादित्य और पाताल लोक की यात्रा

सोलहवीं पुतली – सत्यवती ने जो कथा कही वह इस प्रकार है- राजा विक्रमादित्य के शासन काल में उज्जैन नगरी का यश चारों ओर फैला हुआ था। एक से बढ़कर एक विद्वान उनके दरबार की शोभा बढ़ाते थे और उनकी नौ…

पन्द्रहवीं पुतली – सुंदरवती ~ राजा की हर चीज़ प्रजा के हित की रक्षा के लिए होती है!

पन्द्रहवीं पुतली – सुंदरवती की कथा इस प्रकार है- राजा विक्रमादित्य के शासन काल में उज्जैन राज्य की समृद्धि आकाश छूने लगी थी। व्यापारियों का व्यापार अपने देश तक ही सीमित नहीं था, बल्कि दूर के देशों तक फैला हुआ…

चौदहवीं पुतली – सुनयना ~ विक्रमादित्य और हिंसक सिंह का शिकार!

चौदहवीं पुतली – सुनयना ने जो कथा की वह इस प्रकार है- राजा विक्रमादित्य सारे नृपोचित गुणों के सागर थे। उन जैसा न्यायप्रिय, दानी और त्यागी और कोई न था। इन नृपोचित गुणों के अलावा उनमें एक और गुण था।…

तेरहवीं पुतली – कीर्तिमती~ विक्रमादित्य और सर्वश्रेष्ठ दानवीर!

तेरहवीं पुतली – कीर्तिमती ने इस प्रकार कथा कही- एक बार राजा विक्रमादित्य ने एक महाभोज का आयोजन किया। उस भोज में असंख्य विद्धान, ब्राह्मण, व्यापारी तथा दरबारी आमन्त्रित थे। भोज के मध्य में इस बात पर चर्चा चली कि…

बारहवी पुतली – पद्मावती ~ विक्रमादित्य राक्षस से घमासान युद्ध!

बारहवी पुतली – पद्मावती उस सिंहासन की बारहवीं पुतली थी उसने जो कथा सुनाई वह इस प्रकार है- एक दिन रात के समय राजा विक्रमादित्य महल की छत पर बैठे थे। मौसम बहुत सुहाना था। पूनम का चाँद अपने यौवन…

ग्यारहवीं पुतली – त्रिलोचनी ~ राजा विक्रमादित्य और देवताओं का आवाहन!

ग्यारहवीं पुतली – त्रिलोचनी ने जो कथा कही वह इस प्रकार है-   राजा विक्रमादित्य बहुत बड़े प्रजापालक थे। उन्हें हमेंशा अपनी प्रजा की सुख-समृद्धि की ही चिन्ता सताती रहती थी। एक बार उन्होंने एक महायज्ञ करने की ठानी। असंख्य…