Lakshmi (लक्ष्मी मंत्र)
Lakshmi (लक्ष्मी मंत्र) नमस्ये सर्वलोकानां जननीमब्जसम्भवाम् । श्रियमुन्निद्रपद्माक्षीं विष्णुवक्षःस्थलस्थिताम् ॥ भावार्थ : सम्पूर्ण लोकों की जननी, विकसित कमल के सदृश नेत्रों वाली, भगवान् विष्णु के वक्षः स्थल में विराजमान कमलोभ्दवा श्रीलक्ष्मी देवी को मैं…
Saraswati Mantra (सरस्वती मंत्र)
Saraswati Mantra (सरस्वती मंत्र) या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना । या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥ भावार्थ : जो कुन्द के फूल, चन्द्रमा, बर्फ…
Shiva Mantra ( शिव मंत्र )
Shiva Mantra नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम: शिवाय ॥ भावार्थ : जो शिव नागराज वासुकि का हार पहिने हुए हैं, तीन नेत्रों वाले हैं, तथा भस्म की राख को सारे शरीर में लगाये हुए हैं, इस प्रकार महान्…
गणेश मंत्र
Ganesh Mantra (गणेश मंत्र) वक्र तुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ:। निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभ कार्येषु सर्वदा ॥ भावार्थ : हे हाथी के जैसे विशालकाय जिसका तेज सूर्य की सहस्त्र किरणों के समान हैं । बिना विघ्न के मेरा कार्य पूर्ण हो और सदा ही मेरे लिए शुभ हो…
Durga Saptashloki (श्री दुर्गा सप्तश्लोकी)
Durga Saptashloki (श्री दुर्गा सप्तश्लोकी) दुर्गा सप्तश्लोकी माँ दुर्गा की प्रार्थना है । इन सात श्लोकों में सप्तशती का संपूर्ण सार समाहित होता है । दुर्गा सप्तश्लोकी नवरात्रि दुर्गा पूजा के दौरान सबसे महत्वपूर्ण पाठ माना गया है। ज्ञानिनामपि…
Durga Mantra (दुर्गा मंत्र)
Durga Mantra (दुर्गा मंत्र) सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ भावार्थ : हे नारायणी! तुम सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगल मयी हो। कल्याण दायिनी शिवा हो। सब पुरुषार्थो को सिद्ध करने वाली, शरणागत…
मंत्र पुष्पांजली
ॐ यज्ञेन यज्ञमयजंत देवास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन्| ते हं नाकं महिमान: सचंत यत्र पूर्वे साध्या: संति देवा: ॐ राजाधिराजाय प्रसह्ये साहिने | नमो वयं वैश्रवणाय कुर्महे स मे कामान्कामकामाय मह्यम्| कामेश्वरो वैश्रवणो ददातु| कुबेराय वैश्रवणाय | महाराजाय नम: ॐ…
चाणक्य नीति : प्रथम अध्याय |
चाणक्य नीति : प्रथम अध्याय १. तीनो लोको के स्वामी सर्वशक्तिमान भगवान विष्णु को नमन करते हुए मै एक राज्य के लिए नीति शास्त्र के सिद्धांतों को कहता हूँ. मै यह सूत्र अनेक शास्त्रों का आधार ले कर कह रहा हूँ। 2. जो…
बत्तीसवीं पुतली ~ रानी रूपवती ~ अंतिम कहानी
बत्तीसवीं पुतली रानी रूपवती ने राजा भोज को सिंहासन पर बैठने की कोई रुचि नहीं दिखाते देखा तो उसे अचरज हुआ। उसने जानना चाहा कि राजा भोज में आज पहले वाली व्यग्रता क्यों नहीं है। राजा भोज ने कहा कि राजा विक्रमादित्य के देवताओं वाले गुणों की कथाएँ सुनकर…
इकत्तीसवीं पुतली ~ कौशल्या ~ विक्रमादित्य की मृत्यु
इकत्तीसवीं पुतली – कौशल्या ने अपनी कथा इस प्रकार कही- राजा विक्रमादित्य वृद्ध हो गए थे तथा अपने योगबल से उन्होंने यह भी जान लिया कि उनका अन्त अब काफी निकट है। वे राज-काज और धर्म कार्य दोनों में अपने को लगाए रखते थे। उन्होंने वन में भी साधना के लिए…