पाण्डवों की विश्व विजय और उनका वनवास

पाण्डवों की विश्व विजय और उनका वनवास सभी पाण्डव सब प्रकार की विद्याओं में प्रवीण थे। पाण्डवों ने सम्पूर्ण दिशाओं पर विजय पाई और युधिष्ठिर राज्य करने लगे। उन्होंने प्रचुर सुवर्णराशि से परिपूर्ण राजसूय यज्ञ का अनुष्ठान किया। उनका यह…

इन्द्रप्रस्थ की स्थापना

इन्द्रप्रस्थ की स्थापना द्रौपदी स्वयंवर के पहले विदुर को छोड़ कर सभी पाण्ड्वो को मृत समझने लगे और इस कारण धृतराष्ट्र ने इस कारण शकुनि के कहने पर दुर्योधन को युवराज बना दिया। द्रौपदी स्वयंवर के तत्पश्चात दुर्योधन आदि को…

कर्ण का जन्म, लाक्षाग्रह षड्यंत्र तथा द्रौपदी स्वयंवर

कर्ण का जन्म, लाक्षाग्रह षड्यंत्र तथा द्रौपदी स्वयंवर जब कुन्ती का विवाह नहीं हुआ था, उसी समय (सूर्य के अंश से) उनके गर्भ से कर्ण का जन्म हुआ था। परन्तु लोक लाज के भय से कुन्ती ने कर्ण को एक…

पाण्डु का राज्य अभिषेक

पाण्डु का राज्य अभिषेक धृतराष्ट्र जन्म से ही अन्धे थे अतः उनकी जगह पर पाण्डु को राजा बनाया गया, इससे धृतराष्ट्र को सदा अपनी नेत्रहीनता पर क्रोध आता और पाण्डु से द्वेषभावना होने लगती। पाण्डु ने सम्पूर्ण भारतवर्ष को जीतकर…

चन्द्रवंश से कुरुवंश तक की उत्पत्ति

चन्द्रवंश से कुरुवंश तक की उत्पत्ति पुराणो के अनुसार ब्रह्मा जी से अत्रि, अत्रि से चन्द्रमा, चन्द्रमा से बुध और बुध से इलानन्दन पुरूरवा का जन्म हुआ। पुरूरवा से आयु, आयु से राजा नहुष और नहुष से ययाति उत्पन्न हुए।…

सम्पूर्ण महाभारत ~ संक्षिप्त कथा !

महाभारत संक्षिप्त कथा हम सब ने बचपन से लेकर आज तक कभी न कभी महाभारत की किसी न किसी कहानी या पत्रों के बारे में अवश्य ही पढ़ा और सुना होगा, इस ग्रन्थ की महानता और विशालता का अनुमान महाभारत के प्रथम…

वीर कर्ण की नीति निष्ठां

कर्ण कौरवों की सेना में होते हुए भी महान धर्मनिष्ठ योद्धा थे। भगवान श्रीकृष्ण तक उनकी प्रशंसा करते थे।  महाभारत युद्ध में कारण ने अर्जुन को मार गिराने की प्रतिज्ञा की थी। उसे सफल बनाने के लिए खांडव वन के महासर्प…

भीष्म पितामह और शरशैया

महाभारत में भीष्म जब बाणों की शय्या पर थे तो एक अद्भुत प्रेरक घटना हुयी :   महाभारत का युद्ध अंतिम दौर में था। भीष्म पितामह शरशैया पर लेटे थे। युधिष्ठिर अपने भाइयों के साथ उनके चरणों के समीप बैठे उनका धर्मोपदेश…

अर्जुन का अहंकार

एक बार अर्जुन को अहंकार हो गया कि वही भगवान के सबसे बड़े भक्त हैं। उनको श्रीकृष्ण ने समझ लिया।  एक दिन वह अर्जुन को अपने साथ घुमाने ले गए। रास्ते में उनकी मुलाकात एक गरीब ब्राह्मण से हुई। उसका…

परीक्षित का जीवन मोह

राजा परीक्षित को भागवत कथा सुनाते हुए शुकदेव को छह दिन बीत गए और सर्प के काटने से मृत्यु होने का एक दिन शेष रह गया, तब भी राजा का शोक और मृत्यु का भय कम नहीं हुआ। तब शुकदेवजी…