पुराणो में अलग-अलग कुकृत्यों के लिए अलग-अलग दण्डो का बखान है जो की मृत्यु के बाद व्यक्ति की आत्मा को भोगने पड़ते है. गरुड़ पुराण की विस्तृत व्याख्या सुनके आपके रौंगटे खड़े हो जायेंगे. परस्त्री पुरूष संबंध रखने वाले को लोहे के गर्म सलाखों को आलिंगन करवाया जाता है। जो पुरूष अपने गोत्र की स्त्री से संबंध बनाता है उसे नर्क भोगकर लकड़बघ्घा रूप में जन्म लेना पड़ता है।

टीनएज लड़की से संबंध बनाने वाले को नर्क की घोर यातना सहने के बाद अजगर के रूप में आकर जन्म लेना पड़ता है। जो व्यक्ति काम भावना से पीड़ित होकर गुरू की पत्नी का मान भंग करता है ऐसा व्यक्ति वर्षों तक नर्क की यातना सहने के बाद गिरगिट की योनी में जन्म लेता है।
सखा के साथ दग्गा करके उसके पत्नी से संबंध को यमराज गधे की जिंदगी में जन्म देते हैं। लेकिन व्यभिचार और धोखा देने से भी बड़ा एक पाप है जिसकी सजा कठोर है।
कृष्ण ने दृष्टि में जो सबसे बड़ा पाप है वह है भ्रूण हत्या। महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद जब द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा ने उत्तरा के गर्भ में पल रहे बालक परीक्षित पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करके उसकी हत्या कर दी तब भगवान श्री कृष्ण सबसे अधिक क्रोधित हुए थ।
श्री कृष्ण ने उस समय समय ही यह घोषणा कर दी थी कि अश्वत्थामा का पाप सबसे बड़ा पाप है क्योंकि उसने एक अजन्मे बालक की हत्या की थी। श्री कृष्ण ने इस पाप की सजा स्वयं अश्वत्थामा को दी थी। श्री कृष्ण ने अश्वत्थामा के सिर पर लगा चिंतामणि रत्न छीन लिया और शाप दिया कि तुमने जन्म तो देखा है लेकिन मृत्यु को नहीं देख पाओगे यानी जब तक सृष्टि रहेगी तुम धरती पर जीवित रहोगे और कष्ट प्राप्त करोगे।
भ्रूण की हत्या करने वाले के लिए सबसे कठोर सजा निर्धारित है और ऐसे व्यक्ति को कई युगों तक इस सजा का दंड भुगतना पड़ता है।