प्रथम स्कन्ध में महाभारत के अन्तिम पड़ाव से द्वौपदी ने पुत्रों की निर्मम हत्या पर अश्वत्थामा को क्षमा, गर्भस्थ परीक्षित की रक्षा,कुन्ती ने दु:ख माँगा , कुन्ती और भीष्म स्तुति से , ‘भक्ति-योग’ के बारे में बताया गया है और ‘परीक्षित का जन्म, परीक्षित को श्राप की कथा’ के माध्यम से ये बताया गया है कि एक मरते हुए व्यक्ति को क्या करना चाहिए ? क्योकि ये प्रश्न केवल परीक्षित का नहीं, हम सब का है क्योकि ‘सात दिन’ ही प्रत्येक जीव के पास है, आठवाँ दिन है ही नहीं, इन्ही सात दिन में उसका जन्म होता है और इन्ही सात दिन में मर जाता है.
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