पंचम स्कन्ध

पंचम स्कन्ध में प्रियव्रत चरित्र , आग्नीध्र आख्यान, राजा नाभि के पुत्र ऋषभ देव अवतार के 100 पुत्रों में भरत चरित्र राहुगण को उपदेश |

‘भरत-चरित्र’ के माध्यम से ये बताया गया है कि भरतजी कैसे एक हिरन के मोह में पड़कर अपने तीन जन्म गवा देते है.‘भवाटवी’ के प्रसंग में ये बताया गया है कि व्यक्ति अपनी इन्द्रियों के बस में होकर कैसे अपनी दुर्गति करता है l भुवन कोश , किंपुरुष – भारत वर्ष आदि पृथक पृथक ग्रहस्थिति ‘नरकों का वर्णन’ बताया गया है कि मरने के बाद व्यक्ति की अपने-अपने कर्मो के हिसाब से कैसे नरको की यातना भोगनी पड़ती है।

                                                    श्रीमद्भागवत महापुराण कथा
कथा महात्म्य प्रथम स्कंध द्वितीय स्कंध तृतीय स्कंध
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