पितृ दोष के बचाव

पितृदोष से बचाव के विभिन्न उपाय किसी भी दोष का शमन अथवा निवारण करने से अधिक अच्छा यह होता

है कि उस दोष से बचा जाए। दोष से बचने के उपायों में सबसे अधिक कारगर यह होता है कि दोष होने की स्थिति की अच्छी जानकारी हो। पितृदोष अथवा पितृ प्रकोप क्यों होता है, इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं-

1 :- कुल में दुराचारण के कारण नैतिक मूल्यों का ह्रास होना।

2:- पितरों का विधि-विधानपूर्वक श्राद्ध तर्पण आदि न होना।

3:- जाने अथवा अनजाने में पितरों का अपमान होना।

4:- पितरों को विस्मृत कर देना।

5:- कुल की परम्परा के अनुसार कुलदेवता, कुलदेवी या परम्परागत किसी अन्य लोकमान्य देवता का पूजन न करना।

6:- धर्म के विरुद्ध आचरण करना।

7:- नाग अथवा गाय आदि की हत्या करना या कराना।

8:- कुल में भ्रूण हत्या होना अथवा कुलवधू का चरित्र भ्रष्ट होना।

9:- कुल में जारज संतान का उत्पन्न होना।

10:- ब्राह्मण स्त्री (अथवा कुमारी) से रति-कर्म करना।

11:- कुमारी (किसी भी धर्म की लड़की से बलात्कार करना।

12:- वेश्यागमन करना।

13:- शूद्रादि वर्ग की स्त्रियों से काम-वासना से प्रेरित होकर विवाह संबंध स्थापित करना।

14:- तिथि अमावस्या को सम्भोग क्रिया करना। D देव स्थान या तीर्थ स्थान में अपकर्म करना।

15:- नदी अथवा कुएं आदि में मल-मूत्र विसर्जित करना अथवा नग्न होकर स्नान करना।

यदि व्यक्ति इन दोषों से मुक्त रहे तो वह पितृदोष के प्रकोप से बचा रहता है।

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