मंत्र साधना के लिए तिथि विचार

मानव जीवन को दो भागों में बांटा गया

है:-

१. शुभ

२. अशुभ

इन दोनों पक्षों की नीव केवल तिथियां हैं, यदि हम तिथियों को विचार कर कोई काम करते हैं, तो हमें कोई चिंता नहीं होती इसलिए पहले तिथियों का ज्ञान प्राप्त करो। तिथियां पाँच प्रकार की होती हैं:-

१. नन्दा

२. भद्रा

३. रिक्ता

४. जया

5. पूर्णा ।

यदि शुक्र के दिन नन्दा, बुद्धवार के दिन भद्रा, शनि के दिन रिक्ता, वृहस्पति के दिन पूर्णा ।

यदि इस प्रकार की तिथियां हों तो समझ लो कि आप इससे सिद्धि प्राप्त कर सकते हैं; अन्यथा, उनको आप अशुभ समझें जो

मृत्यु योग की ओर ले जाती हैं।

जो लोग सिद्धि योग में कार्य करते हैं उन्हें सदा लाभ ही होता है, मन को शांति मिलती है। जीवन के सुख प्राप्त होते हैं, अशुभ योग तो केवल कष्ट ही देते हैं।

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