भारतीय पंचांग का तीसरा अंग है नक्षत्र अर्थात जिनका छरण नहीं होता वह नक्षत्र कहलाते हैं नक्षत्र सदैव अपने स्थान पर ही रहते हैं जबकि ग्रह नक्षत्रों में संचार करते हैं नक्षत्रों की संख्या प्राचीन काल में 24 थी जो आजकल 27 है भूत ज्योतिष में अभिजीत नक्षत्र को भी गिनती में शामिल करने से 28 नक्षत्रों की गणना होती है करने की दृष्टि से नक्षत्रों के समान विभाग किए गए हैं जिनमें प्रत्येक विभाग 13 अंश 20 कला का होता है परंतु आकाश में इनका विस्तार वास्तविक रूप में तुल्य नहीं है परंतु इस आधार पर इन में चंद्रमा के रहने की अवधि बराबर नहीं होती इस कारण नक्षत्रों का विभाजन मुहूर्तो में भी किया गया है कोई 7815 मुहूर्त हुई थी स्मूथ तथा कुछ नक्षत्र 45 मुहूर्तो वाले होते हैं एक मुहूर्त दो घडी अर्थात 48 मिनट का होता है पंचांग मैं जिस नक्षत्र में चंद्रमा को स्थित होता है उसी का भोग काल लिखते हैं वही दिन नक्षत्र होता है |