दशम स्कन्ध उत्तरार्ध में भगवान की ‘ऐश्वर्य-लीला’ का वर्णन है- जहाँ भगवान ने वासुरी छोड़कर सुदर्शन चक्र धारण किया उनकी कर्मभूमि,
रुक्मणि आदि आठ विवाह नित्यचर्या, गृहस्थ, का बड़ा ही अनुपम वर्णन है l मुचुकुन्द को दर्शन, शंबरासुर वध , स्यमन्तकमणि खोज, शतधन्वा उद्धार,
भौमासुर मारकर कारावास से प्राप्त 16100 कन्यओं से विवाह प्रत्येक को दस दस पुत्र व एक पुत्री हुई l कृष्ण के 161080 पुत्र,
कुल सन्तान है-177188 पुत्र व पुत्री l
उषा अनिरुद्धप्रेम और वाणासुर युद्ध , गो-दानी राजा नृग गिरगिट उद्धार , पौण्डकवध, द्विविद वध, जरासन्ध वध, शिशुपाल वध , दन्तवक्त्र वध, शाल्व वध , वल्बल वध l सुदामा चरित्र आदि l सूर्य ग्रहण पर्व कुक्षेत्र मे ग्वाल -पाडव -यादव मिलन, वृक्कासुर और भस्म कंकण, भृगु द्वारा त्रिदेव परीक्षा , लीलाविहार |