सप्तम स्कन्ध

सप्तम स्कन्ध में  शिशुपाल और दन्तवक्त्र  के पूर्व जन्म, राजासुयज्ञ की कथा , नृसिंह अवतार ‘प्रहलाद-चरित्र’ के माध्यम से बताया गया है कि हजारों मुसीबत आने पर भी भगवान का नाम न छूटे, यदि भगवान का बैरी पिता ही क्यों न हो उसे भी छोड़ देना चाहिये । मानव-धर्म, वर्ण-धर्म, स्त्री-धर्म,ब्रह्मचर्य गृहस्थ और वानप्रस्थ-आश्रमों के नियम का कैसे पालन करना चाहिये इसका निरुपण है । कर्म व्यक्ति कों कैसे करना चाहिये , स्त्रीधर्म यही इस स्कन्ध का सार है.

                                                 श्रीमद्भागवत महापुराण कथा
कथा महात्म्य प्रथम स्कंध द्वितीय स्कंध तृतीय स्कंध
चतुर्थ स्कंध पंचम स्कंध षष्ठम स्कन्ध सप्तम स्कंध
अष्टम स्कंध नवम स्कंध दशम स्कन्ध (पूर्वार्ध) दशम स्कन्ध (उत्तरार्ध)
एकादश स्कन्ध द्वादश स्कन्ध श्रीमद्भागवतमाहात्म्य

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