षष्टम स्कन्ध

षष्ट स्कन्ध मे भगवान के नाम की महिमा’ के सम्बन्ध में ‘अजामिलोपाख्यान’ आतुर काल (मरणासन्न काल) में भगवान् के नारायण नाम के उच्चारण से अजामिल जैसे पापी का उद्धार हो जाता है। नारद को दक्ष का श्राप ‘नारायण कवच’ का वर्णन है जिससे वृत्रासुर का वध होता है, नारायण कवच वास्तव में भगवान के विभिन्न नाम है जिसे धारण करने वाले व्यक्ति कों कोई परास्त नहीं कर सकता.‘पुंसवन विधि’ एक संस्कार है जिसके बारे में बताया गया है।

                                                  श्रीमद्भागवत महापुराण कथा
कथा महात्म्य प्रथम स्कंध द्वितीय स्कंध तृतीय स्कंध
चतुर्थ स्कंध पंचम स्कंध षष्ठम स्कन्ध सप्तम स्कंध
अष्टम स्कंध नवम स्कंध दशम स्कन्ध (पूर्वार्ध) दशम स्कन्ध (उत्तरार्ध)
एकादश स्कन्ध द्वादश स्कन्ध श्रीमद्भागवतमाहात्म्य

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