षष्ट स्कन्ध मे भगवान के नाम की महिमा’ के सम्बन्ध में ‘अजामिलोपाख्यान’ आतुर काल (मरणासन्न काल) में भगवान् के नारायण नाम के उच्चारण से अजामिल जैसे पापी का उद्धार हो जाता है। नारद को दक्ष का श्राप ‘नारायण कवच’ का वर्णन है जिससे वृत्रासुर का वध होता है, नारायण कवच वास्तव में भगवान के विभिन्न नाम है जिसे धारण करने वाले व्यक्ति कों कोई परास्त नहीं कर सकता.‘पुंसवन विधि’ एक संस्कार है जिसके बारे में बताया गया है।