चतुर्थ स्कन्ध में ये बताया गया है दक्ष कन्याओं का वंशवर्णन सति का योगाग्नि में तन समाप्त दक्ष यज्ञविध्वंस भक्ति सच्ची हो तो उम्र का बंधन नहीं होता ‘ध्रुवजी की कथा’ ने यही सिद्ध किया है वेन के शरीर के मलने से पृथु व अर्चिदेवी अवतार ‘पुरंजनोपाख्यान’ में इन्द्रियों की प्रबलता के बारे में बताया गया है प्रचेताओं की कथा में नारद जी ने जीव हत्या और मांस भक्षण को एक जघन्य अपराध बताया है।
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