चतुर्थ स्कन्ध

चतुर्थ स्कन्ध में ये बताया गया है दक्ष कन्याओं का वंशवर्णन  सति का योगाग्नि में तन समाप्त  दक्ष यज्ञविध्वंस भक्ति सच्ची हो तो उम्र का बंधन नहीं होता ‘ध्रुवजी की कथा’ ने यही सिद्ध किया है वेन के शरीर के मलने से पृथु व अर्चिदेवी अवतार ‘पुरंजनोपाख्यान’ में इन्द्रियों की प्रबलता के बारे में बताया गया है  प्रचेताओं की कथा में नारद जी  ने जीव हत्या और मांस भक्षण को एक जघन्य अपराध बताया है।

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                                                     श्रीमद्भागवत महापुराण कथा
कथा महात्म्य प्रथम स्कंध द्वितीय स्कंध तृतीय स्कंध
चतुर्थ स्कंध पंचम स्कंध षष्ठम स्कन्ध सप्तम स्कंध
अष्टम स्कंध नवम स्कंध दशम स्कन्ध (पूर्वार्ध) दशम स्कन्ध (उत्तरार्ध)
एकादश स्कन्ध द्वादश स्कन्ध श्रीमद्भागवतमाहात्म्य

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