जाने पितृ दोष के कारण एवं निवारण उपाए

हमारे पारिवारिक सदस्य या पूर्वज जिनकी मृत्यु हो चुकी है उन्हें पितृ कहते हैं। पितृ ईश्वर व हमारे बीच की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इनकी ताकत व क्षमताएं ईश्वरीय शक्ति जैसी मानी गई है। पितृ ईश्वर और मानव के बीच एक योनि है जिसमें मरने के बाद मनुष्य की आत्मा कुछ समय के लिए वास करती है।

कहते है कि जब भी व्यक्ति किसी बिमारी या दुर्घटना से अकाल मृत्यु को प्राप्त होता है या मौत के समय यदि कोई इच्छा बाकी रह जाती है तो मृतक पितृ योनि को प्राप्त होता है और वह इस योनि में तब तक भटकता रहता है जब तक उसकी इच्छा पूरी नहीं कर दी जाती । वह भटकती आत्मा परिवार वालों का ध्यान अपनी ओर खीचने के लिए विभिन्न प्रकार से परेशान करना शुरू कर देती है। पितृ दोष निवारण के बाद आत्मा शांत हो जाती है और इसके बाद यह पुनर्जन्म ले लेती है या ईश्वर में लीन हो जाती है।

यदि पितृ आपके कार्यो से सुखी व संतुष्ट हैं तो आपको इसका विशेष फल भी मिलता है। आप जिस कार्य को शुरू करते हैं उसी में फायदा होता है। आपका नाम दिन प्रतिदिन बढ़ता जाता है। कलह और रोग पास भी नहीं फटकते। ऐसा माना जाता है कि जिस परिवार में अधिकतर लोग धर्माचरण करने वाले, सात्विक प्रवृत्ति वाले व ईश्वर की नियमित रूप से प्रार्थना करने वाले होते हैं ऐसे संस्कारी व सद्गुणी लोगों के जीवन में अनहोनी घटनाओं की संभावनाएं कम रहती हैं तथा पितृदोष आदि नहीं होते।

गुरु ग्रह हमारे पूर्वजों का कारक है, इसके अच्छा होने की स्थिति में हमें बुजुर्ग, पितामह व पिता की अच्छी आत्माओं का स्नेह व शक्ति प्राप्त होती रहती है। अगर परिवार के अधिकतर सदस्यों के हाथ में गुरु पर्वत उभरा हुआ हो तो अधिकतर संतान सुख भी अच्छा रहेगा तथा लोग सत्वगुणी होंगे तथा । ऐसे परिवारों में पितृ दोष नहीं होता तथा संतान खूब फलती फूलती है एवं कुल की उन्नति निरंतर होती रहती है।

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