आत्म-रक्षा-मन्त्र मन्त्रः-
“चन्दा बाँधों, सूरज बाँधों । बाँधों गङ्गा माई । तेंतीस कोटि के देवता बाँधों । हनुमत की राम दुहाई । मरघट का मसान बाँधों । मन चाहे लड्डू खाऊँ । पूजा करूँ गणेश की । मन चाहे जहाँ चला जाऊँ । श्री हनुमान जी की राम दुहाई ।।”
विधि –
किसी भी मङ्गलवार को घी – गूगल का होम देते हुए १०८ बार जप करके सिद्ध करें । रक्षा के लिए मन्त्र पढ़कर नीबू काटकर अपने चारों तरफ निचोड़ कर फेंक दें । सर्व – विध रक्षा होगी ।