चमत्कारिक अष्ट यक्षिणियों की साधना, तुरंत मिलेगा फल
ये देहधारी होते हुए भी सूक्ष्म रूप से युक्त होकर जहां चाहे वहां विचरण कर सकते हैं। इनका प्रमुख कर्म धन से संबंधित हैं, ये गुप्त धन या निधियों की रक्षा करते हैं तथा समृद्धि, वैभव, राज पाट के स्वामी हैं। आदि काल से ही, मनुष्य धन से सम्पन्न होने हेतु, अपने धन की रक्षा हेतु, यक्षों की अराधना करते आए हैं। भिन्न-भिन्न यक्षों की प्राचीन पाषाण प्रतिमा भारत के विभिन्न संग्रहालयों में आज भी सुरक्षित हैं, जो खुदाई से प्राप्त हुए हैं।
तंत्रो के अनुसार, रतिप्रिया यक्षिणी, साधक से संतुष्ट होने पर 25 स्वर्ण मुद्राएं प्रदान करती हैं। इसी तरह सुसुन्दरी यक्षिणी, धन तथा संपत्ति सहित, पूर्णायु, अनुरागिनी यक्षिणी, 1000 स्वर्ण मुद्राएं, जलवासिनी यक्षिणी, भिन्न प्रकार के नाना रत्नों को, वटवासिनी यक्षिणी, नाना प्रकार के आभूषण तथा वस्त्र को प्रदान करती हैं। तंत्र ग्रंथों में यक्षिणी तथा यक्ष के साधना के विस्तृत विवरण मिलते हैं।
प्रमुख यक्षिणियां है – 1. सुर सुन्दरी यक्षिणी, 2. मनोहारिणी यक्षिणी, 3. कनकावती यक्षिणी, 4. कामेश्वरी यक्षिणी, 5. रतिप्रिया यक्षिणी, 6. पद्मिनी यक्षिणी, 7. नटी यक्षिणी और 8. अनुरागिणी यक्षिणी।