नाग और सर्प साधनाएं : हिन्दू धर्म में नाग और सर्प को चमत्कारिक माना जाता है। नाग और सर्प में दिव्य आत्माएं निवास करती हैं। प्राचीनकाल में नाग नामक एक रहस्यमयी जाती हुआ करती थी। प्रजापकित कश्यप की पत्नी कद्रू से नागों की उत्पत्ति हुई है। नागों में प्रमुख- अनंत (शेष), वासुकी, तक्षक, कार्कोटक और पिंगला- उक्त पांच नागों के कुल के लोगों का ही भारत में वर्चस्व था। यह सभी कश्यप वंशी थे। इन्ही से नागवंश चला।
नागवंश का संक्षिप्त परिचय
नाग से संबंधित कई बातें आज भारतीय संस्कृति, धर्म और परम्परा का हिस्सा बन गई हैं, जैसे नाग देवता, नागलोक, नागराजा-नागरानी, नाग मंदिर, नागवंश, नाग कथा, नाग पूजा, नागोत्सव, नाग नृत्य-नाटय, नाग मंत्र, नाग व्रत और अब नाग कॉमिक्स।
ग्रामिण क्षेत्रों में बहुत से लोगों के शरीर में नागदेवता आकर लोगों की समस्या का समाधान करते हैं। सर्पो तथा नागों ने देवताओं की कठिन साधना, तपस्या की तथा उन के निकट का ही विशेष पद भी प्राप्त किया। आज भी नागों की कई आलौकिक शक्तियां विचरण कर रही है। नागों के आह्वान और उनकी साधना करके मनचाही सफलता और मनोकामना पाई जाती है। नाग पूजा और साधना के विशेष दिन होते हैं।
कद्रू को नागों की माता कहा गया है। देवी मनसा, जो भगवान शिव की बेटी हैं, उन्हें भी नाग माता कहा जाता हैं, जिनका विवाह जरत्कारू नाम के ऋषि के साथ हुआ था। जनमेजय द्वारा सर्पों के नाश के लिए किए गए यज्ञ से सर्पों की रक्षा की थी देवी मनसा के पुत्र आस्तिक ने।
सर्प प्रजाति के मुख्य 12 सर्प हैं जीने के नाम- 1. अनंत 2. कुलिक 3. वासुकि 4. शंकुफला 5. पद्म 6. महापद्म 7. तक्षक 8. कर्कोटक 9. शंखचूड़ 10. घातक 11. विषधान 12. शेष नाग।